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शक्ति की आराधना में सजा शहर, बढ़ी रौनक

पिछले एक दशक के दौरान दिल्ली में प्रवासियों के कारण जो क्षेत्रीय विविधता आई है उसका बेजोड़ सांस्कृति प्रदर्शन शारदीय नवरात्र के दौरान देखने को मिलता है। यह त्योहार बंगालियों और पूर्वांचलियों की संस्कृति में रचा बसा है।

Author October 11, 2018 5:56 AM
यह त्योहार बंगालियों और पूर्वांचलियों की संस्कृति में रचा बसा है।

रुबी कुमारी

बुधवार से शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही राजधानी दिल्ली का वातावरण भक्तिमय हो गया है। इसके साथ ही शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता पूरी तरह से परिलक्षित होने लगी है। कहीं स्थानीय स्तर पर लगने वाले नवरात्र मेले और रामलीला की धूम है तो कहीं पश्चिम बंगाल और पूर्वांचल की सांस्कृति धरोहर वाले दुर्गा पूजा पंडालों को सजाने की तैयारी जोरों पर है। प्रसिद्ध झंडेवालान देवी मंदिर में नौ दिनों तक चलने वाला नवरात्र मेला शुरू हो चुका है। दिल्ली के बंगाली बहुल इलाकों चितरंजन पार्क, काली बाड़ी, करोल बाग के अलावा गैर बंगाली व पूर्वांचली जगहों पर भी पूजा पंडाल तैयार करने का काम तेजी से किया जा रहा है।

पिछले एक दशक के दौरान दिल्ली में प्रवासियों के कारण जो क्षेत्रीय विविधता आई है उसका बेजोड़ सांस्कृति प्रदर्शन शारदीय नवरात्र के दौरान देखने को मिलता है। यह त्योहार बंगालियों और पूर्वांचलियों की संस्कृति में रचा बसा है। चिरंजन पार्क के पूजा पंडाल में इस बार जहां पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध बाउल गान की झांकी मिलेगी वहीं पूर्वी दिल्ली में मयूर विहार फेस-1 में पंडाल का प्रारूप पॉलिथीन मुक्त भारत है। वहीं करोल बाग पूजा समिति का पंडाल दक्षिण भारतीय शैली के मंदिरों के वास्तुशिल्प से परिचय कराएगा। चितरंजन पार्क जो लघु बंगाल के रूप में जाना जाता है यहां कुल 9 पूजा समितियां हैं। जिनमें से 5 बड़े स्तर पर पंडाल बनाते हैं। नवपल्ली पूजा समिति के अध्यक्ष उत्पल घोष ने कहा कि उनकी समिति की यह 26वीं पूजा है। हर साल की तरह इस साल भी बंगाल की समृद्ध कला-संस्कृति-धर्म को पंडाल के माध्यम से रखने की कोशिश होगी। मंडप में देवी की मूर्ति एकल रूप में होगी और जिसमें सोलह साज-शृंगार होगा।

मयूर विहार फेस-1 में स्थानीय पूजा समिति ने सत्यजीत रे की नेशनल अवार्ड से पुरस्कृत बाल फिल्म ‘गूपी गाइन बाघा बाइन’ की कहानी को अपने पंडाल का थीम बनाया है। फिल्म की पूरी कहानी को कैनवस पर पेंटिंग के जरिए दिखाया जाएगा और कहानी में हल्का बदलाव कर लोगों के बीच दिल्ली को पॉलिथीन से मुक्ति दिलाने का संदेश दिया जाएगा। आयोजक मृणाल बिस्वास ने कहा कि पंडाल की तैयारी में पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल चीजों का प्रयोग किया जा रहा है। पॉलिथीन और थर्मोकॉल पूरी तरह से प्रतिबंधित है, भोजन स्टॉल पर भी इनकी इजाजत नहीं है। यहां तक कि दर्शक भी पंडाल में पॉलिथीन लेकर नहीं जा सकेंगे। मूर्ति में भी रसायनिक रंगों के प्रयोग से बचा जा रहा है ताकि विसर्जन के बाद यमुना में जहर न घुले। वहीं करोल बाग पूजा समिति इस बार का पूजा पंडाल दक्षिण भारतीय मंदिरों के वास्तुशिल्प से लोगों को रूबरू कराएगा।

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