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जिसने लालू यादव के लिए छोड़ दिया था राघोपुर सीट, अब तेजस्वी के खिलाफ फूंका बिगुल, पूर्व मंत्री उदय नारायण राय ने छोड़ी राजद

राघोपुर को लालू परिवार का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन राजद के दो बड़े नेताओं की नाराजगी की वजह से तेजस्वी के लिए यहां मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

Bihar Election, Patna, RJD, JDU, tejashwi yadavलालू यादव की गैरमौजूदगी में पार्टी का कामकाज तेजस्वी यादव ही देख रहे हैं। (फाइल फोटोः पीटीआई)

जैसे-जैसे बिहार विधान सभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे नेता विपक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब राजद के वयोवृद्ध नेता और पूर्व मंत्री उदय नारायण राय उर्फ भोला बाबू ने राजद छोड़ दिया है और तेजस्वी के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। राय ने तेजस्वी को हराने के लिए एनडीए का साथ देने का एलान किया है। लालू-राबड़ी शासनकाल में उदय नारायण राय मंत्री थे।

राय ने ही 1995 में लालू यादव के कहने पर राघोपुर विधान सभा सीट छोड़ी थी। बाद में इसी सीट से लालू यादव 1995 से लेकर 2005 तक विधायक रहे। उनके बाद 2005 से 2010 तक राबड़ी देवी राघोपुर सीट से विधायक रहीं। हालांकि, 2010 में राबड़ी देवी को जेडीयू के सतीश कुमार यादव ने हरा दिया था। 2015 के चुनावों में लालू यादव ने में तेजस्वी की सैफ लैंडिंग इसी सीट से कराई थी। वैशाली जिले के तहत आने वाली इस सीट पर राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह का भी खासा प्रभाव रहा है। पिछले दिनों तेजस्वी यादव ने इस सीट को छोड़कर दूसरी किसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा था लेकिन लालू यादव ने उसे खारिज कर दिया था।

राघोपुर को लालू परिवार का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन राजद के दो बड़े नेताओं की नाराजगी की वजह से तेजस्वी के लिए यहां मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। रघुवंश सिंह को मनाने के लिए ही राजद ने उनके विरोधी रहे रामा सिंह की एंट्री पर रोक लगा रखी है। उधर, रघुवंश सिंह दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं। वो दो महीनों से लगातार बीमार चल रहे हैं। उनकी तबियत नाजुक बताई जा रही है।

ऐसा नहीं है कि उदय नारायण राय उर्फ भोला बाबू ने पहली बार लालू परिवार पर नजरें टेढी की हों। इसी साल जून में उनके समर्थकों ने पटना में राबड़ी देवी के आवास पर जमकर नारेबाजी की थी। ये लोग भोला बाबू को विधान परिषद में भेजे जाने की मांग कर रहे थे। बतौर वर्कर्स लालू यादव ने राय को इसका भरोसा दिया था कि उन्हें विधान परिषद में भेजा जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका। माना जा रहा है कि राय इसी वजह से नाराज चल रहे थे लेकिन अब चुनाव के ऐन वक्त पर उन्होंने पार्टी छोड़ते हुए तेजस्वी के खिलाफ बिगुल फूंका है। आरोप यह भी है कि तेजस्वी का व्यवहार कार्यकर्ताओं के प्रति ठीक नहीं है। ऐसे में तेजस्वी की राघोपुर सीट की लड़ाई आसान नहीं है।

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