महाराष्ट्र की राजनीति में अभी भी बागी सांसदों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की अटकलों के बीच धराशिव सांसद ओमराजे निंबालकर ने शनिवार को शिंदे खेमा ज्वाइन होने के एक सवाल पर जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि वह कोई भी राजनीतिक कदम उठाने से पहले अपने समर्थकों से राय लेने के बाद कोई फैसला लेंगे। इसी बीच खबर आ रही है कि उन्होंने अपने एक करीबी नेता को उद्धव ठाकरे से मिलने मातोश्री भेजा है।

पद्म सिंह पाटिल समेत 8 आरोपी बरी

शिवसेना यूबीटी ओमराजे निंबालकर के पिता और कांग्रेस नेता पवन निंबालकर और उनके ड्राइवर की 2006 में हुई हत्या में मामले में शनिवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने फैसला दिया है, जिसमें उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के भाई पूर्व एनसीपी मंत्री पद्म सिंह पाटिल समेत 8 आरोपियों को बरी कर दिया है। इस पर पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या वे अब शिंदे गुट के ज्वाइन करेंगे।

सांसद दो दिन बाद लेंगे फैसला

इस सवाल के जवाब में ओमराजे ने कहा, “मैं पहले अपने निर्वाचन क्षेत्र जाऊंगा और फिर अपने समर्थकों से राय-मशविरा करूंगा, फिर दो दिनों में फैसला लूंगा।”

कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें पता चल गया होगा- अनिल देसाई

फैसला आने के बाद शिवसेना यूबीटी के सांसद और मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने संकेत दिया कि इस फैसले का ओमराजे निंबालकर के राजनीतिक फैसले पर असर पड़ सकता है। अनिल देसाई ने कहा, “कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें पता चल गया होगा कि हमारा कौन है? अगर ओमराजे को वापस लौटना है तो इस पर फैसला उद्धव ठाकरे लेंगे।”

हालांकि ओमराजे ने स्पष्ट किया कि यह फैसला उनके लिए काफी अहम था, लेकिन शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का निर्णय और कोर्ट का फैसला आपस में जुड़े हुए नहीं थे।

सांसद अनिल ने यह सुझाव देते हुए कि यह मामला ओमराजे के राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन का केंद्र बना रहा है, कहा, करीब 20 सालों तक यह उनके जीवन का सबसे अहम संघर्ष था। उन्हें जो कुछ भी बताया गया और उनसे किए गए वादों पर उन्हें पूरा भरोसा था। अब ऐसा लगता है कि वह भरोसा टूट गया है।

अनिल देसाई ने आगे कहा कि ओमराजे ने दिल्ली में शिवसेना यूबीटी की संसदीय बैठक में शामिल न होकर पार्टी अनुशासन का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा, “उन्होंने एक अहम पार्टी बैठक का बहिष्कार किया और पार्टी अनुशासन को तोड़ा है, लेकिन यदि वह हमारे साथ रहना चाहते हैं तो उद्धव ठाकरे यह फैसला लेंगे।”

ओमराजे के करीबी नेता पहुंचे मातोश्री

इसी बीच शिवसेना यूबीटी के विधायक कैलाश पाटिल पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मिलने मातोश्री पहुंचे। कैलाश पाटिल ओमराजे के बेहद करीबी नेता माने जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर ओमराजे निंबालकर पाला नहीं बदलते तो ऑपरेशन टाइगर पटरी से उतर सकता है, क्योंकि शिवसेना यूबीटी के नौ में से छह बागी दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाएगा।

यह भी पढ़ें: टाइगर, शेर, कुत्ता और फिल्म शोले के डायलॉग: शिंदे-उद्धव की जुबानी जंग ने पकड़ा जोर

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दावे किए। एक ने टाइगर, शेर, भौंकते कुत्तों और एक ऐसे राजनीतिक “ट्रेलर” की बात की जिसका पूरा चित्र अभी सामने आना बाकी है। वहीं दूसरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि अगर उनका उन पर भरोसा खत्म हो जाए तो वे पद छोड़ देंगे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि शिवसेना को “चोरों और गद्दारों” के हाथों में नहीं पड़ने देना चाहिए। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें