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‘आइए, ड्यूटी ज्वाइन कीजिए’, इस्तीफा देने वाले IAS अफसर को सात महीने बाद सरकार ने भेजी चिट्ठी, पहले गृह मंत्रालय ने भेजा था आरोप पत्र

कन्नन ने सरकार के ऑफर पर जो जवाब दिया है, उसकी जानकारी भी उन्होंने ट्विटर पर साझा की है। उन्होंने लिखा है, "मेरे इस्तीफे को लगभग 8 महीने हो गए हैं। सरकार को केवल उत्पीड़न करने आता है, लोगों का और अधिकारियों का। मुझे पता है कि वे मुझे और परेशान करना चाहते हैं।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ पिछले साल अगस्त में अपने पद से इस्तीफा देने वाले आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ पिछले साल अगस्त में अपने पद से इस्तीफा देने वाले आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने ट्वीट कर बताया है कि सरकार ने उन्हें फिर से IAS की नौकरी ज्वाइन करने का न्योता दिया है। कन्नन ने सरकार से आई चिट्ठी का अंश साझा करते हुए ट्वीट किया है, “सरकार से एक पत्र प्राप्त हुआ है। मुझे फिर से IAS के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन करने को कहा गया है। लेकिन मैं कोरोना-19 महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में तन, मन और धन से अपनी सभी सेवाओं का विस्तार करता हूं, यह कर्तव्य एक स्वतंत्र और जिम्मेदार नागरिक के रूप में होगा, किसी आईएएस अधिकारी के रूप में नहीं।”

कन्नन ने सरकार के ऑफर पर जो जवाब दिया है, उसकी जानकारी भी उन्होंने ट्विटर पर साझा की है। उन्होंने लिखा है, “मेरे इस्तीफे को लगभग 8 महीने हो गए हैं। सरकार को केवल उत्पीड़न करने आता है, लोगों का और अधिकारियों का। मुझे पता है कि वे मुझे और परेशान करना चाहते हैं। फिर भी, मैं इस कठिन समय में सरकार के लिए स्वयंसेवक के तौर पर दादर एवं नागर हवेली और दमन-दीव में अपनी सेवा की पेशकश करता हूं लेकिन आईएएस में दोबारा शामिल नहीं होऊंगा।”

बता दें कि कन्नन गोपीनाथ ने पिछले साल 21 अगस्त को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के खिलाफ सरकार पर उत्पीड़न और अन्याय का आरोप लगाते हुए अपनी प्रतिष्ठित आीएएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। तब कन्नन ने कहा था,‘यह यमन नहीं है, यह 1970 के दशक का दौर नहीं है जिसमें आप पूरी जनता को मूल अधिकार देने से इनकार कर देंगे और कोई कुछ नहीं कहेगा।’ इस्तीफा देने के दो महीने बाद गृह मंत्रालय ने उन्हें आरोप पत्र भेजा था और विभागीय जांच का सामना करने को कहा था। लेकिन उस आरोप पत्र पर जवाब मिलने के फिल पांच महीने बाद सरकार ने कन्नन को दोबारा नौकरी पर बहाल करने की पेशकश की है।

सरकार की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि आपका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है और जब तक सरकार उसे स्वीकार नहीं कर लेती औप पदमुक्त नहीं समझे जा सकते हैं। इसके जवाब में कन्नन ने लिखा है कि पिछले सात महीनों से सरकार मुझे वेतन भी नहीं दे रही है। इसलिए मैं कुद को पदमुक्त समझता हूं और आगे IAS की नौकरी का प्रस्ताव ठुकराता हूं।

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