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क्या माफियाओं का सियासी अखाड़ा बनेगा जौनपुर?

आगामी विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल का जौनपुर जिला प्रदेश के नामचीन माफियाओं का सियासी अखाड़ा बनने जा रहा है। इ

Author जौनपुर | Published on: September 9, 2016 4:20 AM

आगामी विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल का जौनपुर जिला प्रदेश के नामचीन माफियाओं का सियासी अखाड़ा बनने जा रहा है। इस खबर ने खुफिया तंत्र और पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अपराध जगत में एक-दूसरे के जानी दुश्मन कहे जाने वाले माफिया डॉन जौनपुर की अलग-अलग विधानसभा सीटों से अपनी-अपनी किस्मत आजमाने जा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक माफिया डॉन बृजेश सिंह अपनी पत्नी को जिले की जफराबाद सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाना चाहते हैं। माफिया डॉन, मऊ से विधायक मुख्तार अंसारी की नजर अब जिले की सदर सीट पर है। वे सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं।

इलाहाबाद के पूर्व सांसद माफिया अतीक अहमद भी जौनपुर में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। वे भी सपा के टिकट पर सदर सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा पार्टी नेतृत्व से जता चुके हैं। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी अपनी पत्नी को मड़ियाहूं से चुनाव लड़ाने की जुगत में लगे हुए हैं। पूर्व सांसद और माफिया धनंजय सिंह खुद जिले की मल्हनी सीट से बसपा से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। जौनपुर सदर सीट से पूर्वांचल के युवा नेता अल्लन सैय्यद भी भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। अल्लन लगातार भाजपा हाईकमान के संपर्क में हैं।

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सभी पार्टियां और प्रत्याशी अपनी-अपनी सियासी जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। सूत्र बताते हैं कि बृजेश सिंह ने जफराबाद सीट इसलिए चुनी है कि यह सीट बनारस से लगी हुई है और यह बृजेश सिंह के प्रभाव वाला क्षेत्र भी है। यहां आसानी से जीत सुनिश्चित हो सकती है। उधर धनंजय सिंह ने विधानसभा पहुंचने के लिए एक बार फिर बसपा का दामन थामा है। वे यहां से विधायक रहे हैं। उनके सांसद बनने के बाद उनके पिता मल्हनी सीट से विधायक बने थे। बसपा धनंजय सिंह और मुन्ना बजरंगी की पत्नी को टिकट देकर ठाकुर मतों को पूरे जिले में अपने पक्ष में करने की जुगत में है। उधर मुख्तार अंसारी भी अपनी पुरानी सीट मऊ को अपने बेटे अब्बास के लिए छोड़ना चाहते हैं। उन्हें एक सुरक्षित मुसलिम बाहुल्य सीट की तलाश है। उनकी नजर जौनपुर सीट पर टिक गई है। अतीक अहमद इलाहाबाद से अपनी पुरानी सीट पर अपने भाई अशरफ को लड़ाना चाहते हैं और खुद किसी और सीट की तलाश में हैं। हालांकि, उनका इरादा इलाहाबाद की फूलपुर सीट से चुनाव लड़ने का है, मगर वहां सपा के सिटिंग विधायक होने की वजह से बात बनती नहीं दिख रही है।

इसलिए उन्होंने दूसरे विकल्प के तौर पर जौनपुर को चुना है। जौनपुर की सदर सीट पर अभी कांग्रेस के नदीम जावेद विधायक हैं। इधर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से उनकी बढ़ती नजदीकी को देखते हुए यह चर्चा शुरू हो गई थी कि वे सपा से चुनाव लड़ सकते हैं। क्योंकि किसी मजबूत दावेदार के न होने की वजह से अखिलेश यादव भी नदीम जावेद को ही यहां से चुनाव लड़ाना चाहते हैं। मगर अब धुरंधरों की निगाह इस सीट पर होने की वजह से सारे समीकरण उलट-पुलट होते दिख रहे हैं। मगर इस सीट पर एक पत्रकार का नाम इस बीच समाजवादी पार्टी के अंदरखाने तेजी से उभर कर सामने आ गया है। पार्टी नेतृत्व इस पत्रकार के बारे में भी गंभीरता से विचार कर रहा है।
सूत्र बताते हैं कि जौनपुर के वरिष्ठ नेताओं से नेतृत्व ने इस नाम को लेकर विचार-विमर्श भी कर लिया है। अब यह आने वाला समय बताएगा कि इस चुनाव में जौनपुर के अवाम को कैसे-कैसे नजारे देखने को मिलेंगे।

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