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विधायकों से मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, इस्तीफों की जांच करूंगा

प्रीम कोर्ट ने कांग्रेस और जेडीएस के 10 बागी विधायकों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष को उनके इस्तीफों पर आज ही फैसला लेना होगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों से कहा है कि वे आज शाम छह बजे तक स्पीकर के सामने पेश हों।

Author बेंगलुूरी/ नई दिल्ली | July 12, 2019 12:22 AM
विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार

कर्नाटक में सियासी घमासान जारी है। विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने गुरुवार को बागी विधायकों के इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं लिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्होंने बागी विधायकों से मुलाकात की और कहा कि वह पूरी जिम्मेदारी से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि धीमी सुनवाई के आरोपों से वह दुखी हैं। किसी भी बागी विधायक ने मुलाकात के लिए उनसे समय नहीं मांगा था। विधानसभा स्पीकर ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने मुझसे फैसला लेने के लिए कहा है। मैंने सारी चीजों की वीडियोग्राफी की है और मैं उसे सुप्रीम कोर्ट को भेजूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने कर्नाटक विधानसभा के नियम 202 के अनुसार सोमवार को सभी इस्तीफों की जांच की। 8 फॉर्म निर्धारित फॉर्मेट में नहीं थे। बाकी के बारे में अभी यह देखना है कि क्या ये इस्तीफे स्वैच्छिक और वास्तविक हैं। मैं पूरी रात इन इस्तीफों की जांच करूंगा और यह पता लगाऊंगा कि क्या ये वास्तविक हैं।’

इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस और जेडीएस के 10 बागी विधायकों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष को उनके इस्तीफों पर आज ही फैसला लेना होगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों से कहा है कि वे आज शाम छह बजे तक स्पीकर के सामने पेश हों। इन विधायकों ने कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष पर उनका इस्तीफा जानबूझकर स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया था।

हालांकि अदालत के आदेश के बाद विधानसभा अध्यक्ष भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके और वक्त की मांग की। उनकी याचिका में कहा गया कि उनका संवैधानिक कर्तव्य और विधानसभा नियम के मुताबिक वो ये सत्यापित करने के लिए बाध्य हैं कि विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक या बिना डर के हैं या नहीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वक्त नहीं दिया और उनकी अर्जी पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमने सुबह आदेश जारी कर दिया है। स्पीकर की ओर से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनकी याचिका शुक्रवार को मुख्य मामले के साथ सुन ली जाए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि आप पहले रजिस्ट्री से संपर्क करें। इसके साथ ही कहा कि हम कल करेंगे सुनवाई।

इसके बाद मुंबई से सभी विधायक बंगलुरुपहुंचे और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच स्पीकर से मिले। मुलाकात के बाद स्पीकर रमेश ने मीडिया से कहा वह सत्तारूढ़ गठबंधन के बागी विधायकों के इस्तीफे के ‘स्वैच्छिक और वास्तविक’ होने की जांच करेंगे। कर्नाटक विधानसभा नियम के अनुसार इस्तीफे को ‘सही प्रारूप’ में होना चाहिए। दुर्भाग्यवश, पिछले सप्ताह मेरे कार्यालय में जो 13 पत्र आए थे, उनमें से आठ सही प्रारूप में नहीं थे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वह न तो मौजूदा राजनीतिकि स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं और न ही इसके परिणाम के लिए जिम्मेदार हैं।

घटनाक्रमों के लेकर स्पीकर ने कहा, ‘छह जुलाई को मैं दोपहर एक बजकर 30 मिनट तक अपने कक्ष में था। विधायक मुझसे मिलने दो बजे आए। किसी भी विधायक ने मिलने का समय नहीं मांगा था। मुझसे पूर्व अनुमति भी नहीं ली थी।’ रमेश कुमार ने कहा कि विधायकों ने मुझसे कोई बात नहीं की और वे सीधा राज्यपाल के पास दौड़ गए। क्या यह दुरुपयोग नहीं है? उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से संपर्क किया। मेरा दायित्व देश के संविधान और इस राज्य के लोगों के प्रति है। मैं देरी कर रहा हूं, क्योंकि मैं इस मिट्टी से प्यार करता हूं। मुझे जल्दबाजी में काम नहीं करना। सुप्रीम कोर्ट ने मुझसे फैसला लेने के लिए कहा है। मैंने सारी चीजों की वीडियोग्राफी की है और मैं उसे सुप्रीम कोर्ट को भेजूंगा।

कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों की धमकी और मुंबई जाने के बारे में कहा कि बागी विधायकों ने मुझे बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें धमकी दी थी और वे डर कर मुंबई गए थे। लेकिन मैंने उनसे कहा कि उन्हें मुझसे संपर्क करना चाहिए था, मैं उन्हें सुरक्षा दिलाता। केवल तीन कार्यदिवस ही बीते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा व्यवहार किया जैसे कोई भूकंप आया हो।

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