बिहार के दरभंगा में बीते दिनों ब्राह्मण समुदाय के 70 लोगों के खिलाफ SC/ST के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इस मामले में नीतीश सरकार के मंत्री और जेडीयू के सीनियर नेता अशोक चौधरी ने कहा है कि इस एक्ट का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
अशोक चौधरी खुद भी अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं।
क्या है यह पूरा मामला?
कुशेश्वर स्थान पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले हरिनगर गांव में हुई एक घटना को लेकर यह मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। कैलाश पासवान और तीन अन्य लोगों ने बकाया मजदूरी को लेकर हुए विवाद के मामले में हेमकांत झा और श्रीनाथ झा पर हमला किया था।
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कैलाश पासवान राजमिस्त्री हैं और उन्होंने 2015 में केरल में हेमकांत की बहन के घर पर निर्माण का कुछ काम किया था। आरोप है कि इस मामले में 2.47 लाख रुपये बकाया था। 29 जनवरी को हेमकांत झा की बहन और उनके जीजा श्रीनाथ झा हरिनगर गांव गए थे। वहां कैलाश पासवान ने उनकी कार को रोक लिया और बकाया देने को कहा।
आरोपों के मुताबिक, श्रीनाथ झा ने बीच-बचाव किया और हेमकांत की बहन और उनके जीजा को सुरक्षित ढंग से गांव से बाहर निकाला। आरोप है कि अगले दिन कैलाश पासवान ने श्रीनाथ झा पर हमला कर दिया। इस मामले में हेमकांत ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
हमले में घायल हुए कई लोग
आरोपों के मुताबिक, 31 जनवरी को ब्राह्मण समुदाय की बस्तियों से डेढ़ सौ से ज्यादा लोग निकल आए और उन्होंने कैलाश पासवान और उसके भाइयों पर हमला कर दिया। इस हमले में धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया और इसमें एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए।
गंभीर रूप से घायल हुए नौ लोगों को दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसी दिन कुशेश्वर स्थान पुलिस ने SC-ST एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत 70 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इन लोगों में हेमकांत झा का भी नाम शामिल है।
क्या कहा पुलिस अफसर ने?
बिरौल के सब-डिविजनल पुलिस अफसर (एसडीपीओ) प्रभाकर तिवारी ने कहा, “हरिनगर गांव में 2,500 से अधिक ब्राह्मण हैं और पासवानों की संख्या मुश्किल से 60-70 है। हमने पूरे गांव के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है। हमने प्रारंभिक जांच के आधार पर मामला दर्ज किया है और इसमें जातिगत पहलू को नहीं जोड़ा जाना चाहिए।”
अशोक चौधरी बोले- एक्ट का होता है दुरुपयोग
अशोक चौधरी ने कहा, “SC/ST एक्ट का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। चाहे वह SC/ST एक्ट हो या दहेज एक्ट, इनका अक्सर दुरुपयोग होता है। ये कानून दलितों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए थे। यदि SC/ST एक्ट का दुरुपयोग होता है तो दलितों के प्रति सहानुभूति कम हो जाएगी और इसका असर सामाजिक एकता पर होगा।”
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