UP News: योगी मंत्रिमंडल ने गुरुवार को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से विस्थापित हुए और वर्तमान में मेरठ जिले में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वास के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सरकार का यह फैसला पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आया है। अधिकारियों के अनुसार, पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित हुए 99 हिंदू बंगाली परिवार लंबे समय से मेरठ जिले की मवाना तहसील के नांगला गोसाई गांव में एक झील के लिए तय की गई जमीन पर रह रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन सभी परिवारों को कानपुर देहात जिले की रसूलबाद तहसील में बसाया जाएगा।

कैबिनेट बैठक के बाद मीडियाकर्मियों को जानकारी देते हुए वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि वर्तमान में इस क्षेत्र के नांगला गोसाई गांव में रह रहे परिवारों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के अनुपालन में ट्रांसफर किया जाएगा। रिहेबिलेशन प्लान के तहत कानपुर देहात जिले की रसूलबाद तहसील के भैसाया गांव में रिहेबिलेशन डिपार्टमेंट के नाम पर दर्ज 11.1375 हेक्टेयर (27.51 एकड़) जमीन पर 50 परिवारों को बसाया जाएगा, जबकि बाकी 49 परिवारों को ताजपुर तरसाउली गांव में 10.530 हेक्टेयर (26.01 एकड़) जमीन पर बसाया जाएगा।

हर एक परिवार को कितनी जमीन दी जाएगी?

उन्होंने बताया कि हर एक परिवार को 0.50 एकड़ जमीन आवंटित की जाएगी। यह जमीन 30 सालों के लिए पट्टे पर दी जाएगी या तो प्रीमियम पर या पट्टे के किराए पर। इसे दो बार 30-30 सालों की अवधि के लिए रिन्यू किया जा सकता है। इसका मतलब है कि अधिकतम पट्टा अवधि 90 साल होगी।

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खन्ना ने कहा कि तय किया गया प्रीमियम या किराया जमा करने के बाद पट्टा दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और विस्थापित परिवारों को सम्मानजनक व सुरक्षित तरीके से बसाने के लिए लिया गया है। खन्ना ने कहा कि मंत्रिमंडल ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को मंजूरी दे दी है। इसके तहत उन्हें सरकारी आवास और जमीन पट्टे उपलब्ध कराए जाएंगे।

उन्होंने आगे बताया कि इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच जिले में, राजस्व गांव परतापुर सहित, आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए जमीन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश नदी पार करते समय हुई एक दुखद घटना के बाद दिया गया था, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी। प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वे किया गया और परतापुर गांव के परिवारों का पुनर्वास किया गया। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जाएगा और साथ ही जमीन पट्टे पर दी जाएगी।

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