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बिहार: बीजेपी के साथ आठ महीने की सरकार में जो सांप्रदायिक उन्‍माद भड़का, उतना नीतीश कार्यकाल में कभी नहीं हुआ!

बिहार में भाजपा के साथ सरकार चला रहे नीतीश कुमार के लिए हालिया कई दंगे सिरदर्द साबित हो रहे हैं। विपक्ष लगातार उन पर हमले बोल रहा है।

Author नई दिल्ली | Published on: March 28, 2018 5:36 PM
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (PTI File Pic)

जब महागठबंधन की सरकार बनी तो सहयोगी पार्टी राजद के मुखिया लालू यादव और उनके परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार घिरते रहे। बीजेपी उन पर नैतिकता के तहत कार्रवाई का दबाव डालती रही। लालू यादव के डिप्टी सीएम बेटे तेजस्वी यादव पर लगे तमाम आरोपों को लेकर कई बार सीएम नीतीश कुमार असहज नजर आए। 18 महीने तक किसी तरह सरकार चलाने के बाद इन्हीं सब वजहों से उन्होंने राजद से गठबंधन तोड़कर बीजेपी से हाथ मिला लिया। संयोग देखिए यहां भी एक बेटा उनके लिए मुसीबत बन गया है। यह बेटा उनकी नए गठबंधन सहयोगी पार्टी बीजेपी से जुड़ा है। केंद्र सरकार में मंत्री अश्वनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे नीतीश कुमार के लिए मुसीबत भरे साबित हो रहे। भागलपुर में हिंदू नववर्ष के दिन जुलूस निकालकर दंगा भड़काने के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी गिरफ्तारी न होने पर विपक्ष सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि अंतरात्मा की आवाज पर महागठबंधन तोड़ने वाला नीतीश कुमार की अंतरात्मा अब कब जागेगी। उधर तेजस्वी यादव भी ट्वीट से बार-बार नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे हैं।

27 जुलाई 2017 को बीजेपी के साथ गठबंधन कर छठीं बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार के लिए यह कार्यकाल कुछ ज्यादा मुश्किल साबित हो रहा है, यह राजनीतिक जानकारों का कहना है। महागठबंधन की करीब 18 महीने की सरकार में छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो लगातार इतने स्थानों पर दंगे नहीं हुए। शायद यही वजह है कि नीतीश कुमार को सार्वजनिक रूप से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के बयान का विरोध करना पड़ा, जो उन्होंने दरभंगा में रामचंद्र यादव की हत्या के बाद दिया था। गिरिराज सिंह ने रामचंद्र यादव की हत्या मोदी चौक की वजह से कही थी, जबकि नीतीश सरकार ने इसके पीछे पुरानी रंजिश करार दी थी। नीतीश ने नेताओं को भड़काऊ बयानबाजी से बाज आने की नसीहत देते हुए जनता से उसके चक्कर में न पड़ने की अपील की थी।

पटना के स्थानीय पत्रकार पंकज श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक भागलपुर,औरंगाबाद के रास्ते सममस्तीपुर के रोसडा में धार्मिक उन्माद के चलते बिहार में लॉ एंड आर्डर एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पहली बार इस मोर्चे पर गम्भीर हमलों का सामना करना पड़ा रहा है। रोसड़ा की इस घटना पर अब तक किसी पार्टी का आधिकारिक बयान तो नहीं आया है। हालांकि जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने जरुर अपने फेसबुक पर लिखा है कि बिहार में कुछ झड़पों को साम्प्रदायिक दंगे का नाम प्रतिपक्ष द्वारा दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका दावा है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 12 वर्षों के कार्यकाल में राज्य में कभी भी कोई बड़े स्तर पर साम्प्रदायिक तनाव नहीं हुआ है। बता दें कि दुर्गा विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प में एसएसपी संतोष कुमार समेत कई अन्य जख्मी हो गए थे। दरअसल इस विवाद की पृष्ठभूमि सोमवार(26 मार्च) को ही तैयार हो गयी थी। उस दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस शहर के फकीराना मोहल्ला से होकर गुदरी बाजार की ओर जा रहा था। एक अन्य धर्म के धर्मिक स्थल के पास जैसे ही पहुँचा किसी शरारती तत्व ने प्रतिमा पर चप्पल चला दिया।

चप्पल प्रतिमा पर तो नहीं लगा लेकिन लोगों की भावना जरूर चोटिल हो गयी। मामला बिगड़ता इससे पहले अमन पसंद लोगों ने भीड़ को समझा लिया।हालांकि देर रात तक ये मामला सोशल मीडिया के जरिए पूरे इलाके में फैल गया। नतीजा मंगलवार(27 मार्च) की सुबह से ही बेगुसराय, समस्तीपुर से लोग रोसडा मुख्यालय में इकट्ठा होने लगे। गुदरी बाजार पहुँच कर भीड़ प्रशासन से आरोपी की गिरफ्तारी की माँग पर अड़ गया।सुबह 8 से 12 बजे तक बावल जारी रहा। नतीजा लगभग 6 घंटे तक सड़क मार्ग तो 2 घंटे तक रेलमार्ग पूरी तरह प्रभावित रहा। हालात बिगड़ता देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो भीड़ ने भी जवाब दिया। जिसमें दलसिंहसराय एसएसपी संतोष कुमार, इंस्पेक्टर नरेश पासवान और रोसड़ा के इंस्पेक्टर बीएन मेहता जख्मी हो गए। इस दौरान भीड़ ने कई बाइक और साइकिलों को आग के हवाले कर दिया।

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