महाराष्ट्र सरकार की ओर से हाल ही में किसानों के लिए कर्ज माफी योजना घोषित की गई, जो राज्य की अब तक सबसे बड़ी योजना है। इसकी कुल राशि 36,585 करोड़ रुपये है।

हालांकि विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि इन आंकड़ों में पात्रता की कड़ी शर्तें हैं, जिनके कारण कई किसान इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे।

20 जून से होगी लागू

सरकार ने बताया कि पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर कृषि ऋण माफी योजना इस माह की 20 तारीख से लागू होगा। इस योजना से महाराष्ट्र के 1.7 करोड़ किसानों में से 55.72 लाख को लाभ मिलेगा। यह योजना एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिए गए फसल ऋणों पर लागू होगी। साथ ही जिन किसानों पर 30 सितंबर 2025 तक कर्ज है, वे 02 लाख रुपये तक की कर्ज माफी के पात्र होंगे।

साल 2019 में दी गई पिछली कर्ज माफी के बाद नियमित रूप से लोन का भुगतान करने वाले किसानों को 50,000 रुपये का प्रोत्साहन अनुदान, जबकि 2 लाख रुपये से अधिक के कृषि लोन वाले किसानों को केवल अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा।

सबसे अहम बात यह है कि इस योजना में भूमि स्वामित्व की कोई सीमा नहीं है। जिन लोगों को 2019 में कर्ज माफी का लाभ मिला था, लेकिन 2025 तक भुगतान करने में चूक गए, उन्हें भी इसमें शामिल किया गया है और उन्हें 50000 रुपये तक की राशि मिलेगी।

विपक्ष शर्तों पर जता रहा आपत्ति

हालांकि विपक्षी दलों ने इस कर्ज माफी योजना की कुछ शर्तों पर आपत्ति जताई है, जैसे की कर्ज माफी को केवल फसल ऋण तक सीमित रखना, जिससे उन किसानों को छूट नहीं मिलती जिन्होंने कृषि उपकरणों या पशु खरीद के लिए आदि के लिए कर्ज लिया होगा। 25 हजार से अधिक मासिक आय वाले वेतनभोगी व्यक्ति, आयकर दाता, 25 हजार रुपये से अधिक आय वाले रिटायर व्यक्ति, निर्वाचित पूर्व और वर्तमान प्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारी भी इसके पात्र नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि इन श्रेणियों में एक करोड़ किसान शामिल हैं।

इसी साल फरवरी में विधानसभा में दिए गए एक जवाब में फड़नवीस सरकार ने कहा था कि 2017 की कृषि कर्ज माफी योजना के तहत पात्र 50.60 लाख किसानों में से 06.56 लाख किसान अभी भी इससे वंचित हैं। 2019 की योजना में लाभार्थियों की संख्या काफी कम (32.42 लाख) थी, लेकिन ऐसा पात्रता अवधि के सख्त होने के कारण और 2017 की योजना से इसके बीच के अंतर के कम होने के कारण हुआ।

अन्य एक्सपर्ट का कहना है कि कर्ज माफी केवल अल्पकालिक राहत है, जबकि किसानों को स्थायी समाधान की जरूरत है जैसे कि बुवाई के दौरान बीजों और उर्वरकों तक आसान और समय पर पहुंच, जो ईरान युद्ध से प्रभावित हुई है।

तेल और उर्वरकों की कमी की आशंकाएं निराधार- CM

हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने तेल और उर्वरकों की कमी की आशंकाओं को निराधार बताया है। आधिकारिक सूत्रों का दावा है कि सरकार को वास्तव में कर्ज माफी के लिए पात्र होने वालों के दायरे को उस सुझाव से कहीं अधिक बढ़ा दिया है, जो योजना के विवरण तैयार करने के लिए गठित समिति द्वारा दिया गया था।

सत्ताधारी गठबंधन महायुति इस कर्ज माफी योजना को राज्य सरकार की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है और फड़नवीस को किसानों का मित्र बता रही है। जबकि विपक्ष इसे लेकर सरकार किसानों के साथ धोखाधड़ी बता रही है।

विपक्ष कर रहा सवाल

विपक्षी दल एनसीपी (शरद पवार) नेता रोहित पवार ने कहा, “किसान पहले से परेशान हैं और जब आप इतनी सारी शर्तों लागू करेंगे तो वे जांच में कैसे खरे उतरेंगे? प्रशासन किसानों की मदद करने के बजाय मामले को और जटिल बना रही है।”

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्द्धन सपकाल ने कर्जमाफी को धोखाधड़ी करार देकर खारिज कर दिया।

इधर किसान कार्यकर्ताओं और नेताओं का मानना है कि यह छूट मिलीभगत वाली है। अखिल भारतीय किसान सभा के नेता अजीत नवले ने कहा कि लगाई गई शर्तें योजना के उद्देश्य को ही फेल कर रही हैं।

स्वाभिमान शेतकरी संघटना के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने कहा, “अगर सरकार किसानों की सहायता करना चाहती है, तो उसे सीधे उनके खातों में राशि जमा कर देनी चाहिए और उनका कर्ज माफ कर देना चाहिए। इस जटिल प्रक्रिया में क्यों उलझाना?”

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महाराष्ट्र में जन्म के समय लड़कियों की संख्या को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। हाल ही में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट 2024 के अनुसार, राज्य में प्रति 1,000 लड़कों पर केवल 899 लड़कियों का जन्म हो रहा है, जो राष्ट्रीय औसत 918 से काफी कम है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें