महाराष्ट्र की राजनीति एक बार भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 लोकसभा सांसद बागी बन चुके हैं और उनके एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की संभावना हैं। शिवसेना यूबीटी की फूट के बीच 20 साल पुराने हत्याकांड की भी चर्चा और उसके आगामी फैसले पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
शिवसेना यूबीटी के छह बागी सांसदों में से एक ओमप्रकाश राजेनंबालकर भी हैं, ये महाराष्ट्र के धाराशिव से दो बार के सांसद हैं।
20 जून के बाद आएगा फैसला
पूर्व विधायक ओमप्रकाश राजेनंबालकर मंगलवार को मुंबई शहर की सिविल और सत्र न्यायालय में अपने पिता, कांग्रेस नेता पवन राजेनंबालकर की 2006 में हुई हत्या के मामले में फैसले का इंतजार कर रहे हैं। मामले की सुनवाई 20 जून तक के लिए स्थगित कर दी गई है क्योंकि सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज को अभी फैसला लिखना है।
ओमप्रकाश राजेनंबालकर शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों की सूची में शामिल छह सांसदों में से एक हैं। वे भी गुरुवार को शिवसेना यूबीटी की बैठक में शामिल नहीं हुए, जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि क्या शिंदे गुट में शामिल होने लिए पैसे की पेशकश की गई तो उन्होंने इनकार करते हुए कहा कि लोगों को ऐसे अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
खबरों के मुताबिक, ओमप्रकाश राजेनंबालकर ने अभी तक लोकसभा अध्यक्ष को दिए गए उस पत्र में साइन नहीं किया है, जिसमें बागी सांसदों ने शिंदे गुट में शामिल होने की बात कही है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे अपने पिता के हत्या मामले में 20 जून को फैसला आने के बाद ही अपना रुख स्पष्ट करेंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके और उनके परिवार के लिए काफी अहम है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के भाई मुख्य आरोपी
मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर 3 जून 2006 में पवन राजेनंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पूर्व राष्ट्रीय बाल कल्याण मंत्री और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के भाई पद्मसिंह पाटिल सहित 9 आरोपियों पर हत्या और आपराधिक साजिश समेत कई आरोपों में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में मुकदमा चल रहा है।
अब 80 वर्ष से अधिक आयु के पद्मसिंह पाटिल मंगलवार को कोर्ट में पेश हुए, वे कोर्ट एंबुलेंस से पहुंच थे और सुनवाई के दौरान व्हीलचेयर पर बैठे थे। पद्मसिंह और पवन राजेनंबालकर दोनों चचेरे भाई थे। पद्मसिंह पर राजनीतिक विद्वेष के कारण हत्या की साजिश रचने के आरोप हैं।
हत्या के दो साल पहले हुए 2004 के लोकसभा चुनावों में पद्म सिंह ने पवन को 484 वोटों के मामूली अंतर से हराकर उस्मानाबाद (अब धराशिव नाम) संसदीय सीट जीती थी।
दी गई थी किलर को पवन की सुपारी
सीबीआई आरोप है कि जीत के बावजूद, पद्मसिंह अपने चचेरे भाई पवन को अपने राजनीतिक करियर के लिए खतरा मानते रहे और उन्हें मारने के लिए एक सुपारी किलर को काम सौंपा। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि पवन ने पद्म पाटिल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, जिनमें टेरना शुगर कोऑपरेटिव के प्रबंधन से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हैं, इससे पद्म पाटिल नाराज हो गए थे।
मंगलवार को ओमप्रकाश राजेनंबालकर और उनका परिवार कोर्ट में मौजूद था। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हमारा परिवार 20 साल 13 दिन से फैसले का इंतजार कर रहा है। मेरे पिता ने 2004 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और मात्र 484 वोटों से हार गए थे, वह भी पद्मसिंह पाटिल को समर्थन देने की झूठी सूचना फैलाने के बाद। हमें उम्मीद है कि न्याय मिलेगा। राजनीति में मेरा प्रवेश इसी घटना से प्रेरित था। मेरा राजनीतिक करियर यह साबित करने के लिए था कि किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या करने से प्रतिद्वंद्विता खत्म नहीं होती, बल्कि एक नया उत्तराधिकारी जन्म लेता है।” ओमप्रकाश राजेनंबालकर ने फैसले की तारीख शनिवार तक स्थगित होने के बाद यह बात कही।
उद्धव के लंबे समय से रहे वफादार
42 वर्षीय ओमप्रकाश राजेनंबालकर ने अपने पिता की हत्या के बाद तीन बाद 2009 में राजनीत में एंट्री ली और शिवसेना के टिकट पर विधायक बने। वे 2019 और 2024 में लोकसभा चुनाव जीते और सांसद बने। 2022 में शिवसेना के टूट के बाद वे उद्धव के साथ बने रहे।
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उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में एक और फूट की खबरों के बीच लोगों का सारा ध्यान पार्टी के नौ सांसदों में से उन छह सांसदों पर केंद्रित हो गया है जिनके अलग होने की आशंका है। गुरुवार को दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में ये छह सांसद मौजूद नहीं थे। इनमें संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दीना पाटिल और ओमराजे निंबालकर शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
