Bengal Elections 2026: चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में भारत निर्वाचन आयोग ने पूर्वी मेदिनीपुर जिले में स्थित लोकप्रिय तटीय स्थलों में घूमने गए लोगों को इलाका छोड़ने का निर्देश दिया है। इन क्षेत्रों में दीघा, मंदारमनी, ताजपुर, उदयपुर और शंकरपुर इत्यादि शामिल हैं। चुनाव आयोग का आदेश है कि इन क्षेत्रों से मंगलवार तक या जल्द से जल्द पर्यटक और गैर निवासी लोग बाहर चले जाएं। बता दें कि बंगाल में पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि आखिर चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने पर्यटकों के लिए इतना बड़ा आदेश क्यों जारी कर दिया, तो बता दें कि इस चुनाव आयोगी के इस निर्देश की वजह यह है कि 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले चुनाव आयोग सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करना चाहता है।
होटलों संचालकों को खास निर्देश
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रभावित तटीय क्षेत्र के होटलों को निर्देश दिया गया है कि मंगलवार शाम 6 बजे से मतदान समाप्त होने तक यह सुनिश्चित किया जाए कि जिले के निवासी न होने वाले व्यक्तियों द्वारा कोई भी कमरा किराए पर न लिया जाए।
राजनीतिक दलों पर भी सख्त आयोग
तटीय क्षेत्र राज्य के सबसे अधिक संख्या वाले पर्यटकों का क्षेत्र रकहा है। इसीलिए यह प्रतिबंध असामान्य रूप से व्यापक दायरे का हो जाता है। चुनाव आयोग ने लागू किए गए मतदान के दौरान राजनीतिक दलों के प्रचारकों को भी क्षेत्र में रहने से रोक दिया है। अधिकारियों ने बताया कि उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा।
बता दें कि चुनाव आयोग के यह निर्देश पहले चरण के मतदान से पहले चलाए जा रहे व्यापक प्रवर्तन अभियान का हिस्सा है, जिसमें उत्तर और दक्षिण बंगाल के कई निर्वाचन क्षेत्रों को शामिल किया गया है। सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों ने कई जिलों में विशेष निगरानी रखी है। आयोग ने मतदान दिवस से पहले कड़ी निगरानी को दर्शाते हुए काम में कथित चूक के लिए अन्य क्षेत्रों में चुनाव अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
चुनाव आयोग ने पहली बार दिखाई इतनी सख्ती
अधिकारियों ने स्वीकार किया कि विधानसभा चुनाव चक्र के दौरान यह आदेश अपनी तरह का पहला आदेश है, जो संवेदनशील तटीय और पर्यटन-बहुल क्षेत्रों में सुरक्षा चिंताओं की सीमा को उजागर करता है। इस कदम ने अपने व्यापक स्वरूप के कारण ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि इसने एक महत्वपूर्ण चुनावी अवधि के दौरान एक प्रमुख पर्यटन क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को प्रभावी रूप से निलंबित कर दिया है।
‘रोहिंग्या जैसा महसूस कराया जा रहा’, वोटर लिस्ट से हटाए गए नाम को लेकर ट्रिब्यूनल पहुंचे आवेदकों का दर्द
पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की आखिरी कोशिश के दौरान, राम प्रसाद बिस्वास, रूपा सेन, सुखदेव सरकार, हसन खान, अनवारा बेगम, चंदन पुरकायत और सबिदुल मुल्ला बिना कोई जवाब पाए वापस लौट गए। पढ़िए पूरी खबर…
