उत्तर प्रदेश के मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने सोमवार को लखनऊ में राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अटकलों का दौर शुरू हो गया था। हालांकि, अब इसे लेकर संजय निषाद की प्रतिक्रिया सामने आई है।

संजय निषाद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “इस मुलाकात के गलत मायने निकाले जा रहे हैं। वो हमारे पुराने और वरिष्ठ नेता हैं, जब हम युवा थे तो वे हमारे उस समय के मार्गदर्शक रहे हैं। अब बीमार थे तो उनसे मिलना हमारा कर्तव्य मिलता है। जब दो नेता मिलते हैं तो राजनीति पर भी चर्चा होती है। हमने विनोद साहनी के बारे में बात की कि अगर एससी/एसटी एक्ट को हटाया नहीं गया होता, तो शायद ऐसी घटना नहीं होती।”

धर्मपाल के साथ हमारी बैठक हुई- संजय निषाद

योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने आगे कहा, “आपके कार्यकाल में ही यह बात उठी थी कि इसे ओबीसी से हटाकर अनुसूचित जाति में जोड़ा जाना चाहिए और इस पर चर्चा होनी चाहिए। हम तो बहुत पहले से कहते आ रहे हैं कि सपा ने बंद किया तो हम बीजेपी के साथ आए, अगर बीजेपी बंद करेगी तो हम विचार किया जाएगा। इसको दूसरा कुछ नहीं सोचना चाहिए। माननीय धर्मपाल जी से शाम को हमारी बैठक हुई। उसका समय तय था। हमने चर्चा की कि निषाद आरक्षण के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा आरजीआई को लिखा गया पत्र और 2022 में माननीय गृह मंत्री द्वारा आरजीआई को लिखा गया पत्र। इसमें कहा गया है कि केवट, मल्लाह और मझवार अनुसूचित जाति श्रेणी में आते हैं, उसे सामाजिक न्याय मंत्रालय के समक्ष उठाया जाना चाहिए।”

निषाद ने मुलाकात की तस्वीरें शेयर की थीं

निषाद ने इस मुलाकात की तस्वीरे सोशल मीडिया पर शेयर की थी। हाल के दिनों में निषाद ने अपने समुदाय से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात की है। इसमें निषादों के लिए 9 प्रतिशत आरक्षण की मांग और गोंडा मर्डर केस को संभालने के तरीके की आलोचना शामिल है। गोंडा में विरोध प्रदर्शन के दौरान निषाद पार्टी के प्रमुख ने विनोद साहनी की हत्या के आरोपियों के एनकाउंटर और उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने की मांग की थी। उनके इस विरोध ने बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया था, क्योंकि निषाद ने चेतावनी दी थी कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।

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उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने गुरुवार देर शाम लखनऊ के केजीएमयू मुर्दाघर में पार्टी कार्यकर्ता विनोद साहनी की मौत को लेकर धरना दिया। इलाज के दौरान साहनी की मौत हो गई थी। निषाद ने आरोप लगाया कि गोंडा में उन पर गोली और चाकू से हमला किया गया था। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…