पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, एक-एक कर उनसे करीबी साथ छोड़ रहे हैं। शनिवार को चंद्रिमा भट्टाचार्य ने टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। साथ ही उन्होंने इसका कारण भी बताया।

ममता गुट का साथ छोड़ने के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा, “हम पर जो भरोसा पहले ममता बनर्जी का दिख रहा था, उसमें मुझे कमी दिखी। उस भरोसा पर सवाल उठ रहे थे, तो इसलिए जहां पर विश्वास नहीं है, वहां पर काम ठीक से नहीं हो पाता। इसलिए मैंने इस्तीफा दिया है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने क्यों दिया इस्तीफा?

अपनी वफादारी से जुड़े सवाल पर चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा, “हमारी वफादारी पर सवाल उठाने वाले टीएमसी नेता कुणाल घोष का हम सम्मान करते हैं लेकिन वो सवाल उठाने वाले कौन होते हैं? ममता बनर्जी जानती हैं कि हमारी वफादारी है या नहीं लेकिन कल जो घटना घटी है उसे लेकर ममता ने कहा कि बागी गुट के विधायकों से मैंने टीएमसी भवन पर कब्जा करवा दिया है तो ये मुझे बुरा लगा, इसलिए मैंने इस्तीफा दिया है।”

शुक्रवार शाम को टीएमसी के बागी गुट ने ऋतब्रत की अगुवाई में कोलकाता के टीएमसी हेडक्वार्टर पर कब्जा कर लिया और बागी विधायकों ने गेट की चाभी भी अपने हाथ में ले लिया। चंद्रिमा इसी घटना की बात कर रही थीं।

आगे ऋतब्रत बनर्जी गुट को ज्वॉइन करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी मैं वे बागी हैं या नहीं इस मुद्दे पर बात नहीं करूंगी क्योंकि कुछ मामले कोर्ट में हैं और कुछ चुनाव आयोग के सामने हैं। मैं इस पर अभी बात नहीं करना चाहती।

ममता की काफी करीबी थीं चंद्रिमा भट्टाचार्य

ममता बनर्जी ने हाल में विधानसभा चुनाव हार के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य को सुब्रता बख्शी की जगह पर प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। चंद्रिमा भट्टाचार्य को ममता बनर्जी का काफी करीबी माना जाता था। उनके इस इस्तीफे से पार्टी और ममता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

यह फैसला रातों-रात नहीं लिया- ममता

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने इस इस्तीफे बाद कहा, “जिस शख्स (चंद्रिमा भट्टाचार्य) ने आज इस्तीफा दिया, उन्होंने यह फैसला रातों-रात नहीं लिया। वह लंबे समय से पार्टी छोड़ने की योजना बना रही थीं क्योंकि उनके बेटे पहले ही उस पार्टी में शामिल हो चुके थे। तो ठीक है। कोई भी राजनीतिक पार्टी सिर्फ एक या दो लोगों पर निर्भर नहीं होती। यह अपने कार्यकर्ताओं और जनता पर टिकी होती है। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जब कोई व्यक्ति कई दिनों तक मेरी सुरक्षा में रहा क्योंकि उन्हें बीजेपी द्वारा गिरफ्तार किए जाने का डर था। मैंने उन्हें रहने की जगह, खाना और सहारा दिया।”

कुणाल घोष ने क्या कहा था?

उनके इस्तीफे के बाद टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा, चंद्रिमा भट्टाचार्य हमारी दीदी थीं, उनका बेटा पहले ही बागी गुट में चला गया था। जब कल वे ऑफिस में थीं तब वे बागी विधायक आए। अगर वे कुछ और समय तक वहां रहतीं तो ताले नहीं लग पाते। वे बतौर अध्यक्ष वे छोड़ चली गईं।”

आगे कहा, “ममता बनर्जी CM थीं, तब चंद्रिमा भट्टाचार्य के पास सबसे अधिक विभाग थे। अगर वह नाराज थीं, तो बातचीत हो सकती थी, लेकिन विपक्षी खेमे में शामिल होने से लगता है कि यह पहले से तय था।”

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दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में कोलकाता स्थित पार्टी के हेडक्वार्टर पर कब्जा कर लिया। बागी गुट ने दावा किया कि टीएमसी के असली गुट वो हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें