Nitish Kumar Resignation News: बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राज्यसभा में सीट हासिल करने के कुछ ही दिनों बाद सोमवार को बिहार विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इससे राज्य की राजनीति में एक युग का अंत हो गया। इस घटनाक्रम के बाद उनके समर्थकों में मायूसी साफ नजर आ रही है। वहीं, मंत्री अशोक चौधरी उनके इस्तीफे के बाद रोते हुए दिखे।
अशोक चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। ऐसा इस वजह से क्योंकि एक सदन की सदस्यता लेने के बाद दूसरे सदन से इस्तीफा देना होता है। उनकी राज्यसभा जाने की इच्छा थी। इस देश में दूसरा नीतीश कुमार तो नहीं हो सकता है।”
नीतीश कुमार कोई नॉर्मल आदमी नहीं- अशोक चौधरी
मंत्री अशोक चौधरी ने आगे कहा, “नीतीश कुमार कोई नॉर्मल आदमी नहीं थे। उनकी हर एक विभाग पर पकड़ काफी मजबूत थी। वो चीजों को बहुत अच्छी तरह से समझते थे।” उन्होंने याद दिलाया कि जब वे कांग्रेस में थे तब भी नीतीश जी उनका उतना ही सम्मान करते थे। खासकर कोरोना काल में दोनों के बीच संबंध और भी घनिष्ठ हो गए।
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बिहार सरकार के मंत्री और JDU नेता अशोक चौधरी ने कहा, “विकास की जो लाइन नीतीश कुमार ने खींची है। उनके बाद जो भी आएगा उसके लिए एक बड़ी चुनौती होगी। वे हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे। सदन चलेगा तब दिल्ली जाएंगे, वरना बिहार में रहेंगे। उनके मार्गदर्शन में सरकार चलेगी। हो सकता है कि उन्होंने ये निर्णय कुछ अच्छा सोचकर लिया हो।”
बिहार को नीतीश कुमार का मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहेगा- चौधरी
चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार को न केवल एक नेता के रूप में, बल्कि विद्याचंद सागर और मदन मोहन मालवीय जैसे महान समाज सुधारक के रूप में भी याद किया जाएगा। सदन में उनकी अनुपस्थिति निश्चित रूप से महसूस की जाएगी, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत यह इस्तीफा आवश्यक था। जेडीयू और बिहार को उनका मार्गदर्शन हमेशा प्राप्त रहेगा।
बता दें कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि नीतीश के बाद बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कौन पदभार संभालेगा, क्योंकि गठबंधन समीकरण में जेडीयू और बीजेपी दोनों ही वर्चस्व हासिल करने की कोशिश कर सकती हैं। हालांकि, जेडीयू अंदर से आ रही टिप्पणियों को देखते हुए यह घोषणा तुरंत होने की संभावना नहीं है, जहां नेताओं ने बार-बार एक संवैधानिक प्रावधान का हवाला दिया है। यह एक मुख्यमंत्री को विधायिका का सदस्य न होते हुए भी छह महीने तक पद पर बने रहने की अनुमति देता है। पढ़ें पूरी खबर…
