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दिल्ली: राजौरी गार्डन पर कौन करेगा राज!, उपचुनाव में तीनों पार्टियां ने ठोती ताल

11 अप्रैल को इस उपचुनाव के नतीजे तक 22 अप्रैल को होने वाले नगर निगमों के लिए चुनाव प्रचार शीर्ष पर पहुंचने लगेगा।

Author नई दिल्ली | Published on: March 19, 2017 4:21 AM
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) प्रतीकात्मक चित्र

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद देश की राजधानी दिल्ली में चुनावों की शुरुआत नौ अप्रैल को राजौरी गार्डन विधानसभा सीट के उपचुनाव से होने वाली है। 11 अप्रैल को इस उपचुनाव के नतीजे तक 22 अप्रैल को होने वाले नगर निगमों के लिए चुनाव प्रचार शीर्ष पर पहुंचने लगेगा। वैसे, तो देश के अन्य भागों में सक्रिय ज्यादातर राजनीतिक दल दिल्ली में चुनाव लड़ते रहे हैं। लेकिन दिल्ली में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में ही मुख्य मुकाबला होना है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों से पहले दिल्ली में प्रचंड बहुमत से दो साल पहले सरकार बनाने वाली आप का मनोबल सबसे ऊंचा था। देश की सरकार चला रही भाजपा निगमों में अपेक्षित काम न कर पाने के कारण बैकफुट पर थी और कांग्रेस तो कई चुनावों में हाशिए पर जाने के कारण अपनी खोई जगह पाने के लिए संघर्ष करती दिख रही थी। विधानसभा चुनावों ने आप के हौसले पस्त कर दिए, कांग्रेस को मुकाबले में ला दिया और भाजपा को जीवनदान दे दिया। वास्तव में क्या हालात बने हैं यह इन चुनावों में दिखेंगे।

कांग्रेस की मीनाक्षी चंदेला
राजौरी गार्डन सीट से कांग्रेस ने फिर से इस सीट के पूर्व विधायक दयानंद चंदेला की बहू मीनाक्षी चंदेला को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा और अकाली दल में सीट पाने की होड़ लगी है। पिछले कई चुनाव इस सीट से भाजपा की सहयोगी अकाली दल चुनाव लड़ती रही है। इस सीट से 2013 में विधायक बने और 2015 में आप के जनरैल सिंह से चुनाव हारे मनजीत सिंह सिरसा अपना टिकट तय मान कर समीकरण बनने में लगे हुए हैं। वहीं भाजपा के सबसे बड़े पंजाबी चेहरा सुभाष आर्य अपनी दावेदारी मान रहे हैं। आप ने उम्मीदवार घोषित नहीं किया है लेकिन आप से किसी सिख के ही चुनाव लड़ने की चर्चा है। 2006 के परिसीमन से पहले इस सीट से कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन विधायक रहे। परिसीमन के बाद पुराने विष्णु गार्डन सीट के ज्यादातर इलाके इस सीट से मिला दिए गए। उसके बाद यह सीट पंजाबी बहुल नहीं रही। विष्णु गार्डन से विधायक रहे दयानंद चंदेला भाजपा से बगावत करके राजौरी गार्डन से चुनाव लड़े और अकाली भाजपा उम्मीदवार अवतार सिंह हित को महज 84 वोट से हराने में कामयाब रहे। वे अपने इलाके से न केवल चुनाव जीतने में कामयाब होते हैं बल्कि अपने परिवार के सदस्यों को निगम पार्षद बनवा लेते हैं। गुर्जर बहुल ख्याला से लेकर अनधिकृत कालोनियों में असर के कारण उन्हें कई चुनावों में बढ़त मिलती रही है। उनके खिलाफ आपराधिक मामला होने के कारण कांग्रेस ने उनके बजाए उनकी बहू को ही पिछली बार टिकट दिया था। आप की आंधी में मीनाक्षी को 14 हजार ही वोट मिल पाए और वे तीसरे नंबर रहीं।

तो क्या यह जुआ है?
कांग्रेस ने उन्हें टिकट देकर जुआ खेला है। कांग्रेस के वोटों की बदौलत आप दिल्ली जीती। वही वोट चंदेला परिवार की पैठ वाले हैं। पंजाबी वोट तो पहले भी भाजपा को ज्यादा मिलता रहा है। अगर चंदेला को बढ़त मिलती है तो इस बात पर मुहर लग जाएगी कि 2016 के निगम उपचुनाव में कांग्रेस के पास जो वोटरों के लौटने का सिलसिला चला था वह आगे बढ़ रहा है और निगम चुनाव में उन्हें लाभ दिलाएगा। पंजाब चुनाव हारने के बाद पहला चुनाव लड़ रहे आप नेता अरविंद केजरीवाल की टीम का यह चुनाव बड़ा इम्तहान बनने वाला है। जिस जनरैल सिंह को महज 1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपियों को टिकट देने के कारण तब के केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम पर जूता फेंकने के ईनाम के तौर पर आप ने राजौरी गार्डन से टिकट दिया। वे दस हजार वोटों के अंतर से भाजपा-अकाली गठबंधन के उम्मीदवार सिरसा को पराजित किया। उन्हें इस जनवरी में विधानसभा से इस्तीफा दिलवाकर पंजाब में चुनाव लड़वाया गया। कहा गया कि उन्हें पार्टी उपमुख्यमंत्री बनाएगी। आप पंजाब में हारी और जनरैल सिंह भी हारे। वे अब दिल्ली के वोटर नहीं हैं। इसलिए पार्टी किसी और सिख को चुनाव लड़वाएगी। दिल्ली में सिख वोटर तो करीब चार लाख हैं, लेकिन उनका असर देश भर में होता है।

निगम चुनावों के लिए अहम
राजौरी गार्डन के नतीजे दिल्ली विधानसभा के लिए अहम नहीं हैं। वे अगले महीने होने वाले नगर निगम चुनावों के लिए अहम हैं। पंजाब हार के सदमे में डूबी आप ने अगर इस चुनाव में ढिलाई की तो उसे नगर निगम में भी ज्यादा कुछ हासिल नहीं होने वाला है। देश भर में जीत का डंका बजाने वाली भाजपा के लिए उपचुनाव से ज्यादा निगम चुनाव जीतना जरूरी है। इसलिए उन्होंने आनन-फानन में सारे ही पार्षदों के टिकट काटने की घोषणा कर दी है। कांग्रेस भले ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनाव हार गई हो लेकिन पंजाब की जीत से दिल्ली के कांग्रेस नेता गदगद हैं।

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