मंगलवार को सम्राट चौधरी को बिहार विधायक दल का नया नेता चुना गया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को राज्यपाल को त्यागपत्र सौंपा। उसके बाद बिहार विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में उप-मुख्यमंत्री रहे विजय सिन्हा ने विधायक दल के नेता पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम प्रस्तावित किया जिस पर सर्वसम्मति की मुहर लग गयी। इस तरह सम्राट चौधरी बिहार का नए मुख्यमंत्री बने।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बाद सम्राट चौधरी दूसरे ऐसे नेता हैं जो पार्टी में शामिल होने के सात-आठ साल के अन्दर राज्य के मुख्यमंत्री पद तक पहुँच गये। साल 2017 में भाजपा में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी को राज्य उपाध्यक्ष बनाया गया और बाद में उन्हें विधान परिषद सदस्य चुना गया।

राबड़ी देवी सरकार में सम्राट चौधरी बने थे मंत्री

सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी दिग्गज समाजवादी नेता रहे थे। सम्राट का राजनीतिक सफर 1990 के दशक में शुरू हुआ। सम्राट चौधरी मई 1999 में राबड़ी देवी सरकार में पहली बार मंत्री बने थे मगर उम्र से जुड़े विवाद के बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।

सम्राट चौधरी नीतीश कुमार सरकार में बिहार के उपमुख्यमंत्री थे और गृह मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे थे। पिछले साल बिहार विधान सभा चुनाव के बाद जब भाजपा गठबंधन को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ तब सम्राट चौधरी भाजपा विधायक दल के नेता चुने गये। नीतीश कैबिनेट में लगातार दूसरी बार उन्हें डिप्टी सीएम चुना गया। 2020 के विधानसभा चुनावों में एनडीए की जीत के बाद वह नीतीश की सरकार में मंत्री बने। मार्च 2025 में, उन्हें संजय जायसवाल के स्थान पर भाजपा की बिहार इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

सम्राट के पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक रहे

सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को बिहार के मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में हुआ था। उनके पिता शकुनी चौधरी और माता पार्वती देवी दोनों ही राजनीति से जुड़े रहे हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी मां पार्वती देवी तारापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। शिक्षा की बात करें तो सम्राट चौधरी ने मदुरई कामराज विश्वविद्यालय से पीएफसी की डिग्री प्राप्त की है। उनका विवाह वर्ष 2007 में ममता चौधरी से हुआ। उनके दो बच्चे हैं- बेटा प्रणय प्रियम चौधरी और बेटी चारू प्रिया।

सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और मई 1999 में बिहार सरकार में कृषि मंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने 2000 और 2010 में परबत्ता (विधानसभा क्षेत्र) से चुनाव लड़ा और विधायक चुने गए। साल 2010 में, उन्हें बिहार विधानसभा में विपक्षी दल का मुख्य सचेतक बनाया गया। जून 2014 में उन्होंने बिहार सरकार में शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री के रूप में शपथ ली और कार्यभार संभाला। 2018 में, उन्हें भारतीय जनता पार्टी में बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया गया । 2021 में, सम्राट को नीतीश कुमार के विस्तारित मंत्रिमंडल में भाजपा कोटे से पंचायती राज मंत्री बनाया गया। उन्होंने जीतन राम मांझी सरकार में 2014 में शहरी विकास और आवास, स्वास्थ्य मंत्री और राबड़ी देवी सरकार में 1999 में मौसम विज्ञान और बागवानी मंत्री के रूप में भी कार्य किया है।

सम्राट चौधरी से के विवादित बयान

जून 2023 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए चौधरी ने उनकी दाढ़ी की तुलना ओसामा बिन लादेन से की थी। उन्होंने कहा था, “राहुल गांधी ओसामा बिन लादेन की तरह दाढ़ी बढ़ाते हैं और सोचते हैं कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बन जाएंगे।”

साल 2023 में उनका एक और विवादित बयान हंगामे का कारण बना था कि देश 1947 में नहीं बल्कि 1977 में JP आंदोलन के बाद आजाद हुआ था। इसके अलावा नीतीश कुमार के मुखर आलोचक के रूप में जाने जाने वाले सम्राट चौधरी ने जेडी(यू) द्वारा भाजपा से संबंध तोड़ने के बाद पगड़ी पहनी थी और यह प्रतिज्ञा की थी कि वे इसे तभी हटाएंगे जब उनकी पार्टी सत्ता में वापस आएगी। जब नीतीश ने फिर से एनडीए में वापसी की तो उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया। इसके कुछ दिनों बाद सम्राट ने अयोध्या में राम मंदिर का दर्शन करने के बाद पगड़ी खोल दी थी।

बिहार के मुख्यमंत्री पद पर किन जातियों का दबदबा रहा है

जब बात बिहार के मुख्यमंत्री के चयन की है, ऐसे में जाति फैक्टर भी काफी अहम होने वाला है। बीजेपी की ओर से सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, संजय टाइगर जैसे कई नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में हैं। इस बीच बिहार के इतिहास को भी जानने की जरूरत है, जहां 23 मुख्यमंत्रियों ने शासन किया। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें