उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र में पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी के एक नेता ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।
शनिवार को आयोजित परीक्षा में एक सवाल पूछा गया था- “अवसर के अनुसार बदल जाने वालों के लिए एक शब्द में उत्तर दें।” इसके लिए चार विकल्प दिए गए थे। A- सदाचारी, B- पंडित, C- अवसरवादी और D- निष्कपट।
सवाल के विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई गई। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले का संज्ञान लेते हुए इस संबंध में जांच के निर्देश दिए हैं।
ब्रजेश पाठक ने जताई आपत्ति
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सवाल में दिए गए विकल्पों पर सरकार को गंभीर आपत्ति है और इसका संज्ञान लिया गया है।
पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “सवाल को लेकर जो विकल्प दिए गए उन पर हमें कड़ी आपत्ति है। सरकार ने गंभीरता से इस मामले को संज्ञान में लिया है। किसी भी सवाल से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।”
पाठक ने कहा, “मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। इस पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
पाठक ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान, समानता और संवेदनशीलता के सिद्धांत पर काम करती है। प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
प्रदेश सचिव ने लिखा सीएम योगी को पत्र
‘पंडित’ विकल्प को लेकर सत्ताधारी बीजेपी के भीतर से ही आपत्तियां उठने लगी हैं। ब्राह्मण समुदाय से संबंध रखने वाले बीजेपी की उत्तर प्रदेश इकाई के सचिव अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सवाल पर आपत्ति जताई है और प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अपने पत्र में मिश्रा ने कहा कि सवाल गलत तरीके से तैयार किया गया और असंवेदनशील प्रतीत होता है। मिश्रा ने कहा, ”अवसर के अनुसार रूप बदलने वाले व्यक्ति का सही अर्थ ‘अवसरवादी’ है लेकिन विकल्पों में ‘पंडित’ को शामिल करना एक विशेष समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। ‘पंडित’ शब्द ज्ञान और धार्मिक सम्मान से जुड़ा है। इसे अवसरवादिता से जोड़ना अनुचित, असंवेदनशील और जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है।”
सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश
बीजेपी सचिव मिश्रा ने कहा, ”यह न केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकार की छवि को धूमिल करने, जातीय तनाव पैदा करने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास भी लगता है।” बीजेपी नेता ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि सवाल तैयार करने और पेपर सेट करने वाली समिति के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही इस सवाल को आधिकारिक रूप से निरस्त करने और भविष्य में सामाजिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाए।
यूजीसी नियमों, ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद
यह वाकया ऐसे वक्त में हुआ है, जब केंद्र की भाजपा सरकार को शिक्षण संस्थानों में यूजीसी के नियमों को लेकर काफी विरोध झेलना पड़ा है। इससे पहले फिल्म अभिनेता मनोज वाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। इस मामले में देश भर में एफआईआर दर्ज होने और अदालतों में याचिका दायर होने के बाद फिल्म निर्माताओं ने फिल्म के शीर्षक से पंडत शब्द हटाने का फैसला किया था।
इससे पहले दिसंबर में उत्तर प्रदेश में बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों ने एक बैठक की थी। कहा गया था कि वे बीजेपी सरकार में खुद को लगातार हाशिए पर महसूस कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें- कांशीराम को लेकर राहुल गांधी पर भड़कीं मायावती
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम के अनुयायियों और समर्थकों को कांग्रेस के खिलाफ सतर्क रहने की सलाह दी है। मायावती ने कहा है कि उनकी दलित विरोधी मानसिकता और सोच के कारण ही बसपा का गठन हुआ। क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
