डग्गामार टैम्पो का सहारा ले रहे लोग, कहां गईं नोयडा की बसें?

दिल्ली में सम-विषम योजना पर बहस के बीच नोएडा में बेहाल सार्वजनिक परिवहन को लेकर सरकार और प्रशासन सुस्त है। यहां सार्वजनिक परिवहन के नाम पर लोगों को डग्गामार टैम्पो का ही सहारा लेना पड़ता है।

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नोयडा बसों की फाइल फोटो

दिल्ली में सम-विषम योजना पर बहस के बीच नोएडा में बेहाल सार्वजनिक परिवहन को लेकर सरकार और प्रशासन सुस्त है। यहां सार्वजनिक परिवहन के नाम पर लोगों को डग्गामार टैम्पो का ही सहारा लेना पड़ता है। लोगों को जहां ज्यादा किराया देना पड़ता है, वहीं अपनी जिंदगी का अहम समय सड़कों पर गुजार देना पड़ता है। सिटी बसें कई बार चलाई और बंद कर दी गर्इं। सिटी बसें क्यों बंद कर दी गर्इं, इसका जवाब न तो प्राधिकरण के पास है और न ही प्रशासनिक अफसरों के पास।

नोएडा में प्राधिकरण ने शहर बस सेवा शुरू की थी। प्राधिकरण ने दावा किया था कि सेक्टरों को बस सेवा देकर लोगों को उनकी परेशानी से मुक्त किया जाएगा। इसके लिए प्राधिकरण ने शहर में रूट भी बना दिए थे। साथ ही कहा गया था कि ये बसें औद्योगिक और आवासीय सेक्टरों से होकर चलेंगी। कुछ बसें दादरी, दिल्ली और गाजियाबाद समेत बाकी बसें शहर में चलेगी। नोएडा में रूट संख्या दस, पांच, तीन, दो, चार और सात समेत सारे रूट तय किए गए थे। इनमें से गोल चक्कर के रास्ते सेक्टर-6, दस, ग्यारह, बारह, सेक्टर 55-56 खोड़ा कालोनी के रास्ते सेक्टर 62 को जाने वाली रूट संख्या दस शुरू की थी।

रूट तीन संख्या भी शुरु की थी। रूट संख्या तीन का रूट सेक्टर 62 से सेक्टर 18 से सरकारी अस्पताल के रास्ते गोल चक्कर तक आना जाना था। फेस टू , ग्रेटर नोएडा से आने वाली बस को सेक्टर 12-22 के रास्ते सेक्टर 62 तक जाती थी। इसके अलावा प्राधिकरण ने दादरी रूट बनाया था। इस रूट के लिए नई दिल्ली से लालकुआ, बादलपुर के रास्ते दादरी तक और नई दिल्ली से गोल चक्कर से सेक्टर 37, भंगेल, बरौला, सेक्टर 49 से फेस टू , सुरजपुर से दादरी तक जाना था। नई दिल्ली से अभी भी बस का यह रूट जारी है। बाकी बनाए गए रूटों पर बसों संचालन भी बड़ी तेजी के साथ किया गया था। लेकिन अबं पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।

नोएडा शहर में बढ़ती आबादी को लेकर यातायात साधन का अभाव है। शहर में यातायात का साधन सिर्फ बैठरी वाले रिक्शा और टैम्पो रह गए हैं। हर सेक्टर में इनका आना-जाना है। नोएडा शहर में बैटरी वाले करीब आठ हजार रिक्शा और 18 हजार के करीब टैम्पों चलते हैं। रिक्शा की संख्या करीब चार हजार के आसपास है। इसके अलावा करीब एक हजार से ज्यादा बड़ी बसों का संचालन होता है। नोएडा में इन अवैध साधनों ने अपने आप ही रूट बना लिए हैं। ये वाहन छोटे-छोटे रास्तों से गुजरते हैं। सेक्टर एक से 18 , 37, भंगेल, फेस से आगे के रूट भी बना लिए गए। इसके अलावा एक्सप्रेस वे और दूसरे सेक्टरों से होकर भी आते-जाते है।

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