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…जब आजमगढ़ में योगी आद‍ित्‍य नाथ की जान लेने के ल‍िए टूट पड़े थे हमलावर, चतुराई से बचा जीवन

किताब के मुताबिक योगी आजमगढ़ में विरोधी पार्टियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एक आतंक-विरोधी रैली को संबोधित करने जा रहे थे।

Author नई दिल्ली | November 23, 2017 8:19 AM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। Express Photo by Vishal Srivastav

एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ उन भारतीय नेताओं में शामिल हैं, जो आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) की हिट लिस्ट में हैं। वह काफी समय से आतंकवादी संगठनों की हिट लिस्ट में शुमार हैं। लेकिन शायद ही आप जानते हों कि योगी पर एक दशक पहले जानलेवा हमला हो चुका है। यह हमला उन पर किसी आतंकी संगठन ने नहीं, बल्कि आजमगढ़ के कुछ असामाजिक तत्वों ने किया था। 7 सितंबर, 2008 को योगी के काफिले पर हमला हुआ था। टाइम्स ग्रुप बुक्स द्वारा प्रकाशित योगी आदित्यनाथ: अ सैफ्रन सोशलिस्ट नाम की एक किताब में इस हमले का जिक्र किया गया है। किताब के मुताबिक इस दिन योगी आजमगढ़ में विरोधी पार्टियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए एक आतंक-विरोधी रैली को संबोधित करने जा रहे थे। विपक्षी नेताओं ने 2008 के अहमदाबाद ब्लास्ट में कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किए गए अबू बशीर के घर की ओर रुख करना शुरू कर दिया था।

किताब के मुताबिक हिंदू युवा वाहिनी की अगुआई में कई हिंदूवादी संगठनों ने एेलान किया कि वह आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ एक रैली का आयोजन करेंगे। इस रैली में योगी आदित्यनाथ मुख्य वक्ता थे। 7 सितंबर 2008 की सुबह गोरखनाथ मंदिर से 40 वाहनों का काफिला रवाना हुआ। चूंकि आजमगढ़ में कुछ गलत होने का अंदेशा था, इसलिए योगी की टीम ने तैयारियां की हुई थीं। काफिले में योगी की लाल रंग की एसयूवी सातवें नंबर पर थी।

एेसे हुआ हमला: दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर जब काफिला टकिया (आजमगढ़ से थोड़ा पहले) से गुजर रहा था तो एक पत्थर काफिले की सातवीं गाड़ी पर आकर लगा। इसके बाद चारों तरफ से पत्थरों की बारिश शुरू हो गई। चंद पलों में पेट्रोल बम से हमला किया गया। यह एक सिंक्रनाइज हमला था, जिसकी पहले ही अच्छी तरह योजना बनाई गई थी। इससे योगी के समर्थक तितर-बितर हो गए। काफिला तीन हिस्सों में बंट गया। 6 वाहन आगे चले गए और बाकी पीछे रह गए। किताब के मुताबिक जो बीच में थे वे हमले की चपेट में आ गए। इसके बाद हमलावरों ने वाहनों को घेरकर हमला करना शुरू कर दिया। लेकिन उनका निशाना योगी आदित्यनाथ थे, जिन्हें वह अब तक ढूंढ नहीं पाए थे। योगी के न मिलने के कारण वह और उग्र हो गए। जब काफिले के लोगों को होश आया तो हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था-योगी कहां हैं?

…तो कहां गायब हो गए थे योगी?: हमले की सूचना मिलते ही पुलिस स्टेशनों से टीमें भेजी गईं। इस बीच आसपास के विक्रेता मदद के लिए दौड़े और गाड़ियों के आसपास सुरक्षा घेरा बना लिया। सिटी सर्किल अॉफिसर शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने जवाबी कार्रवाई का आदेश दिया। इसमें एक शख्स मारा गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन योगी का अब तक कोई अता-पता नहीं था। उनकी खोजबीन और तेज कर दी गई। लेकिन योगी तो पहले ही बहुत आगे निकल चुके थे और बाकी गाड़ियों के आने का इंतजार कर रहे थे। दरअसल योगी को काफिले की पहली गाड़ी में शिफ्ट कर दिया गया था। यह सब पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में हुआ, जहां काफिला कुछ देर के लिए रुका था। अंतिम समय में हुए इस बदलाव की जानकारी हमलावरों को नहीं थी।

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