अगर आपको किसी ने मारने का मन बना लिया है तो कोई सुरक्षा नहीं बचा सकती, LK आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह के बयान पर मचा था बवाल

दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं, अपने लंबे सियासी सफर में वह कई बार अपने बयानों से ही वह सियासी भूचाल की स्थिति पैदा कर चुके हैं।

Digvijay Singh Lal Krishna Advani
दिग्विजय सिंह और लाल कृष्ण आडवाणी (फाइल फोटो) Source- Indian Express

दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं, अपने लंबे सियासी सफर में वह कई बार अपने बयानों से ही वह सियासी भूचाल की स्थिति पैदा कर चुके हैं। साल 2004 में भी ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला था। जब सिंह (Digvijay Singh) के एक बयान से भारतीय जनता पार्टी का पारा चढ़ गया था। लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) उन दिनों इंडिया शाइनिंग यात्रा निकाल रहे थे, मध्य प्रदेश के जबलपुर में उनकी सुरक्षा को लेकर कोई बात आई तो दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने कह दिया कि यदि किसी ने आपको जान से मारने का मन बना लिया है तो दुनिया की किसी भी तरह की सुरक्षा आपको नहीं बचा सकती है।

उनकी इस टिप्पणी का जिक्र दीपक तिवारी की किताब “राजनीतिनामा मध्य प्रदेश” में है। किताब के अनुसार दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) जेड प्लस सुरक्षा होने के बावजूद सुरक्षा के तामझाम से बचते थे। सुबह उठने के बाद वह मुख्यमंत्री निवास में लोगों से बिना अपॉइंटमेंट के ही मिला करते थे। बीच बीच में वह कुछ महत्वपूर्ण लोगों के साथ टहल-टहल कर भी बात करने लगते थे।

किताब के अनुसार दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत सतर्क नहीं रहते थे, जो टिप्पणी उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी के लिए दी थी, उसे वह खुद मानते भी थे। श्य़ामला हिल्स स्थित बंगले के लॉन पर देर रात कर लोगों से मिलते रहना और पैदल चलकर अपने सचिवों को बुलाना उनकी खास शैली हुआ करती थी।

लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयान पर भाजपा का जबरदस्त विरोध देखने को मिला था। कई नेताओं द्वारा कांग्रेस पार्टी पर दिग्विजय सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी लेकिन कुछ दिनों के सियासी टकराव के बाद यह मामला शांत हो गया था।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लालकृण आडवाणी ने साल 2004 में भारत उदय यात्रा निकालते हुए इंडिया शाइनिंग का नारा दिया था। चूंकि इससे पहले की दो यात्राओं का भारतीय जनता पार्टी को भरपूर फायदा मिला था, लिहाजा इसके लिए पार्टी ने जबरदस्त तैयारी की थी। यह यात्रा किसी भ्रष्टाचार या पार्टी की नींव मजबूत करने के लिए नहीं बल्कि अटल सरकार की खूबियां गिनाने के लिए थी। जिसके आधार पर जनादेश मांगा जा सके लेकिन राजनीति के जानकारों का कहना है कि यह रथयात्रा फ्लॉप हो गई थी। तमाम एक्जिट पोलों के दावों के बावजूद बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए गठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ा था।

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