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पप्पू यादव ने बताई थी स्कूल-कॉलेज में ‘दबंगई’ की कहानी, कहा- जूते में रखते थे चाकू

जाप नेता पप्पू यादव को हाल ही में नीतीश सरकार ने 32 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार करवाया है, उन्हें फिलहाल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव। (फाइल फोटो)

बिहार में कोरोना के बढ़ते केसों के बीच जाप नेता पप्पू यादव सरकार की कमियों को उजागर कर के एक बार फिर लाइमलाइट में आ गए हैं। एक दिन पहले ही बिहार पुलिस ने उन्हें लॉकडाउन के नियम तोड़ने के मामले में गिरफ्तार किया है। बाद में कहा गया कि उनकी गिरफ्तारी 32 साल पुराने अपहरण के केस में हई है। फिलहाल पप्पू यादव 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इस मामले को दोबारा खोलने को लेकर बिहार सरकार की काफी आलोचना हो रही है। हालांकि, कभी खुद पप्पू यादव भी खुद के बाहुबली बनने की कहानी भी मीडिया में बता चुके हैं। कुछ समय पहले ही एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कैसे स्कूल जाने वाले साधारण लड़के से वे दबंग बने थे।

दरअसल, न्यूज वेबसाइट ‘द लल्लनटॉप’ को दिए इंटरव्यू में पप्पू यादव से एंकर ने पूछा था- “एक दम से लड़के के ऊपर ठप्पा लगता है अपराधी का। स्कूल छूटा, पॉलिटिक्स में आ गए। जहां से आप निर्दलीय चुनाव जीते- सिंहेश्वर से लोगों ने कहा कि बाकी जगहों पर मतदान होता है, सिंहेश्वर में मतहरण हुआ। इतना बूथ कैप्चरिंग हुआ, इस तरह के इल्जाम लगते हैं। हुआ क्या कि पढ़ने वाला लड़का अचानक ठप्पा लगा दिया- बाहुबली। बीच में हुआ क्या था?”

इस पर पप्पू यादव ने बताया, “स्कूल में झगड़ा, रगड़ा। स्कूल में दो गुटों के बीच गोली चल जाना। बम फेंक दो पटका वाला, यह आम था। पहले हम बड़का वाला जूता पहनते थे और उसमें रामपुरी चाकू रखते थे।” जब एंकर ने मजाक में कहा कि ऐसा होता था कि स्कूल जाने से पहले किताबें बाद में रखो, पहले चाकू, तमंचा, दो तीन बम जेब में। तो इस पर पप्पू यादव हंसते हुए बोले- बम जेब में रखिएगा तो फटेगा न। ग्रुप जब बना तो वहां भूमिहार ग्रुप, यादव ग्रुप, राजपूत ग्रुप बन गए।”

पप्पू यादव ने कहा, “कॉलेज में उस वक्त झंझट होता था, तो उस वक्त हम अपनी मां का जेवर बेचकर 3 नॉट 3 खरीद लिया। हम जिला स्कूल के प्रोडक्ट थे। एक लड़का को दुकानदार मार दिया, जिला स्कूल से 400 लोग आकर लड़का को बचा ले गए। वो बचा गया, हम धरा गए। उस वक्त न हमारे ऊपर कोई केस था, न कुछ था। कॉलेज में जीतने वाला स्कूल का प्रीफेक्ट। समाज बैकवर्ड-फॉरवर्ड की ओर कदम बढ़ा चुकी थी और उसी वक्त 16 साल के पप्पू यादव का पदार्पण हुआ।”

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