कांग्रेस के कमांडर की छवि अभी नहीं हुई साफ

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद प्रदेश में कांग्रेस का कमांडर कौन होगा इसे लेकर पार्टी में तो घमासान मचा ही हुआ है, पार्टी के बाहर भी लोगों की निगाहें लगी हुई हैं कि कांग्रेस अब किसे आगे करती है।

Himachal Pradesh
वीरभद्र का नहीं मिला अब तक विकल्‍प। फाइल फोटो।

ओमप्रकाश ठाकुर

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद प्रदेश में कांग्रेस का कमांडर कौन होगा इसे लेकर पार्टी में तो घमासान मचा ही हुआ है, पार्टी के बाहर भी लोगों की निगाहें लगी हुई हैं कि कांग्रेस अब किसे आगे करती है। चार दशकों से कांग्रेस में वीरभद्र सिंह का एकछत्र राज था और हॉलीलाज सत्ता का केंद्र था। उनके जाने के बाद पार्टी में ऐसा कोई नेता नजर नहीं आ रहा है जिस पर अभी सहमति बनती नजर आ रही हो। अब कांग्रेस आलाकमान को ही तय करना है कि उसे प्रदेश में कांग्रेस को कैसे आगे बढ़ाना है।

कभी दस जनपथ के बेहद करीबी रहे पूर्व मंत्री व अब राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा इन दिनों हाशिए पर हैं। वे प्रदेश कांग्रेस में यदा कदा अपना दखल देते रहते थे व पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू से लेकर पूर्व मंत्री विद्या स्टोक्स तक उनका साथ देती थीं। कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का जितना भी विरोधी खेमा था उसे आनंद शर्मा से कहीं न कहीं शह मिलती रहती थी व कुछ नेता प्रदेश कांग्रेस में उभरे भी। लेकिन अब वे फिलहाल पार्श्व में जा चुके हंै और आलाकमान के डर से इन दिनों प्रदेश कांग्रेस में उनका कोई नाम भी नहीं लेता है।

मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर इन दिनों पार्टी के भीतर विरोध का सामना कर रहे है। उन्हें हटाने की मांग को लेकर एक चिट्ठी भी साझा हो रही है। चिट्ठी में कुछ लोगों के नाम तो हैं, लेकिन वे हैं कौन इस बाबत कांग्रेस में ही किसी को खबर नहीं है। जाहिर है कि राठौर को हटाने के लिए पिछले दिनों जो मुहिम चली थी यह उसी का हिस्सा है। यह चिट्ठी पार्टी के सहप्रभारी संजय दत्त के प्रदेश के दौरे से पहले लिखी गई थी। इसका संदेश साफ था कि पार्टी में पंजाब की तरह ही अंदरखाने आग सुलग रही है। इस चिट्ठी के बाहर आने के बाद कुलदीप सिंह राठौर ने बीते दिनों एलान कर दिया कि इस तरह की चिट्ठियों का कोई मतलब नहीं है और उपचुनाव ही नहीं 2022 के विधानसभा के चुनाव भी उन्हीं की कमान में लड़े जाएंगे। वे दिल्ली गए थे व समझा जा रहा है कि उन्हें वहां से कोई आश्वासन जरूर मिला होगा।

लेकिन उनके एलान से कांग्रेस का घमासान रुकने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में प्रदेश में मंडी संसदीय हलके के अलावा फतेहपुर, जुब्बल-कोटखाई और अर्की विधानसभा हलकों के चुनाव प्रस्तावित है। इन हलकों में कांग्रेस में प्रत्याशियों में ज्यादा विवाद नहीं है लेकिन इन्हें कांग्रेस पार्टी जिताएगी कैसे यह बड़ा सवाल है।

कुछ अरसा पहले हुए चार नगर निगमों के चुनाव पहले ऐसे चुनाव थे जो पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सक्रियता के बगैर लड़े गए थे। आनंद शर्मा भी कहीं नहीं थे। इनमें से कांग्रेस ने दो नगर निगमों में जीत हासिल की थी। इन चुनावों में कांग्रेस ने सामूहिक तौर पर काम करने की रणनीति अपनाई और यह कामयाब रही।

अब आगामी उपचुनावों को लेकर भी कांग्रेस इसी तरह की रणनीति पर काम कर रही है। इन उपचुनावों में तो कांग्रेस में मुख्यमंत्री का मसला नहीं है लेकिन 2022 के आम चुनावों में कांग्रेस में मुख्यमंत्री कौन होगा यह बड़ा सवाल होगा व कांग्रेस को इस सवाल से जूझना भी पड़ेगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वीरभद्र सिंह की जगह तो कोई नहीं ले सकता लेकिन अगर उपचुनावों व आगामी आम चुनावों में पार्टी सामूहिक तौर पर आगे बढ़ी तो प्रदेश में पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है।

दूसरे पंजाब व उतरप्रदेश वाला फार्मूला तो अपनाया ही जा सकता है। संगठन में अध्यक्ष के साथ कार्यकारी अध्यक्ष बना दो और सरकार में मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री बिठा दो। साफ है कांग्रेस में अभी धुंध साफ होने वाली नहीं है।

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