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बीजेपी के मंत्री ने डार्विन के सिद्धांत को बताया था गलत, परीक्षा में पूछ लिया गया उन पर सवाल

मानव के क्रम-विकास के डार्विन के सिद्धांत को गलत बताने वाले बीजेपी के मंत्री सत्यपाल सिंह पर ही एक परीक्षा में छात्रों से सवाल पूछ लिया गया। पुणे स्थित इंडियन इन्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) की परीक्षा में छात्रों से सवाल पूछा गया है।

मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह। (फाइल फोटो)

मानव के क्रम-विकास के डार्विन के सिद्धांत को गलत बताने वाले बीजेपी के मंत्री सत्यपाल सिंह पर ही एक परीक्षा में छात्रों से सवाल पूछ लिया गया। पुणे स्थित इंडियन इन्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) की परीक्षा में छात्रों से सवाल पूछा गया- ”भारत के मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री ने हाल ही में दावा किया कि क्रम-विकास की डार्विन की थ्योरी गलत है क्योंकि हमारे पूर्वजों समेत किसी ने न तो लिखित और न ही मौखिक रूप से कहा कि उन्होंने बंदर को इंसान बनते देखा। इस तर्क के साथ क्या गलत है?” इस प्रश्न के साथ ही एक नोट भी दिया गया जिसमें कहा गया- ”प्रश्न में यह नहीं पूछा गया है कि जीवविज्ञानी क्रम-विकास के सही होने पर क्यों विश्वास करते हैं। यह पूछा गया है कि विकास के डार्विन सिद्धांत का खंडन करने के मामले में दिया गया तर्क क्यों सही नहीं हो सकता है।”

परीक्षा में पूछा गया सवाल। (फोटो सोर्स- फेसबुक)

मंत्री के तर्क पर पूछे गए सवाल की बात पर इंस्टीट्यूट के डीन ने कहा कि यह पूछे का उद्देश्य छात्रों की तार्कित सोच को परखने का था। आईआईएसईआर के डीन संजीव गलांडे ने कहा मंत्री के तर्क को लेकर पूछा गया सवाल किसी तरह का बयान नहीं था, बल्कि तर्किक प्रश्न था। गलांडे ने कहा कि हम आईआईएसईआर में शिक्षण के शैक्षणिक तरीके पर जोर देते हैं और प्रश्न पत्र सारांश-आधारित नहीं होते हैं और छात्र उनका सोच समझकर और तार्किक जवाब देते हैं। इसी तरह परीक्षा में पूछे गए सवाल का उद्देश्य सीधा था।

बता दें कि सत्यपाल सिंह ने पिछले महीने एक कार्यक्रम में दावा किया था मानव के क्रम-विकास की डार्विन की थ्योरी वैज्ञानिक तौर पर गलत है और इसे स्कूलों के पाठ्यक्रम में नहीं होना चाहिए। आईपीएस अधिकारी से नेता बने सत्यपाल सिंह के इस बयान ने वैज्ञानिक समुदाय को नाराज कर दिया था। सत्यपाल सिंह ने कहा था- ”मानव के क्रम विकास पर डार्विन की थ्योरी वैज्ञानिक तौर पर गलत है। इसे स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में बदले जाने की जरूरत है। जब से धरती पर आदमी देखा गया, वह हमेशा से आदमी ही रहा। हमारे पूर्वजों समेत किसी ने भी लिखित और मौखिक तौर पर नहीं कहा कि उन्होंने एक बंदर को मानव बनते देखा।

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