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सिंघु बॉर्डर पर वही हुआ जो पाकिस्तान चाहता है, बोले कैप्टन अमरिंदर, कहा- केंद्र जांच कराए

बकौल कैप्टन अमरिंदर हम लंबे समय से चेतावनी दे रहे थे कि पाकिस्तान शांति भंग करने के लिए कृषि कानूनों पर अशांति का फायदा उठाने की कोशिश करेगा।

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि लालकिला परिसर की घटना के चलते किसानों के खिलाफ किया जा रहा दुष्प्रचार बंद किया जाना चाहिए। सिंह ने यहां एक बयान में कहा, ‘जो हो रहा है और आज जो सिंघु बॉर्डर पर हुआ, पाकिस्तान वही चाहता है।’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों को दिल्ली में किसानों के आंदोलन के दौरान हाल की गड़बड़ी और हिंसा में पड़ोसी देश की संभावित भूमिका की जांच करनी चाहिए। बकौल कैप्टन हम लंबे समय से चेतावनी दे रहे थे कि पाकिस्तान शांति भंग करने के लिए कृषि कानूनों पर अशांति का फायदा उठाने की कोशिश करेगा।

वहीं पंजाब सीएम ने सिंघु बॉर्डर पर ‘कुछ उपद्रवियों’ द्वारा शुक्रवार को की गई हिंसा की निंदा करते हुए केंद्र से उन ‘कथित स्थानीय लोगों’ का पता लगाने के लिए पूरे मामले की जांच कराने का आग्रह किया है जिन्होंने कथित रूप से सुरक्षा घेरा तोड़ कर किसानों एवं उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। पंजाब के मुख्यमंत्री ने पूछा, ‘वास्तव में क्या वे स्थानीय लोग थे।’

कैप्टन ने उनका पता लगाने और वह कहां से आए थे, इस बारे में जानने के लिए पूरे मामले की उचित तरीके से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘मैं यह नहीं मान सकता कि स्थानीय लोग इस तरह से किसानों के खिलाफ हो जाएंगे। हित साधने के लिए हो सकता है कि इन उपद्रवियों को समस्या पैदा करने के लिए दूसरे स्थानों से बुलाया गया हो।’ कैप्टन ने कहा कि स्थानीय लोगों ने किसानों को ‘गद्दार’ करार दिया है, और इसे वह सच नहीं मान सकते हैं ।

इधर भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के एक किसान नेता ने कहा कि अगले कुछ दिन में सिंघु तथा टीकरी बॉर्डरों की तरफ और किसान जाएंगे। उल्लेखनीय है कि गाजियाबाद प्रशासन ने आंदोलनकारी किसानों को मध्य रात्रि तक यूपी गेट खाली करने का बृहस्पतिवार को अल्टीमेटम दिया था जबकि दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं के खिलाफ ‘लुकआउट’ नोटिस जारी किए थे।

इधर किसान संगठनों ने शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा के किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लामबंद करना शुरू कर दिया। वहीं, शिरोमणि अकाली दल और इनेलो जैसे राजनीतिक दलों ने भी किसानों का साथ देने की घोषणा की। किसान नेताओं ने दावा किया कि जींद, हिसार, भिवानी और रोहतक सहित हरियाणा के कई हिस्सों से किसानों ने केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली की सीमाओं की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है।

इन लोगों का कहना है कि किसान नेताओं के खिलाफ सरकार के कदम से उनका आंदोलन कमजोर नहीं होगा। भारतीय किसान यूनियन (चडूनी) के एक नेता ने कहा कि हरियाणा में कई खाप पंचायतों ने बैठकें कीं और किसान आंदोलन को समर्थन देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि कई गांवों ने प्रदर्शन में अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली भेजने का फैसला किया है। शिरोमणि अकाली दल ने आज अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे दिल्ली की सीमाओं पर तीन प्रदर्शन स्थलों पर आंदोलन को मजबूती देने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचें। (एजेंसी इनपुट)

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