बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर ने जब से बांकीपुर सीट से उपचुनाव लड़ने का ऐलान किया है, तब से कई राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं। 30 जुलाई को बांकीपुर उपचुनाव के लिए मतदान होना है जबकि 3 अगस्त को नतीजे घोषित किए जाएंगे। प्रशांत किशोर का इस उपचुनाव में उतरना इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन पर किसी एक सीट से चुनाव लड़ने का दबाव था। हालांकि, तब पार्टी ने उन्हें चुनावी मैदान में नहीं उतारने का फैसला किया था।

जानकारी के लिए बता दें कि बांकीपुर सीट पांच बार के विधायक और भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है। जन सुराज पार्टी ने इस सीट से प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद पीके ने पार्टी और कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि “बिहार को बदलने की दिशा में यह एक और बड़ा कदम है।”

जारी बयान में प्रशांत किशोर ने कहा, “जन सुराज मेरी जिंदगी पिछले चार साल से है और सच कहूं तो कम से कम अगले 10 साल तक भी रहेगी। जब तक बिहार को बदलने का मेरा सपना पूरा नहीं हो जाता, तब तक मेरे मन में कोई दूसरा उद्देश्य नहीं है।”

पीके ने आगे कहा कि अगर बांकीपुर में जीत मिलती है, तो इससे सिर्फ पार्टी ही मजबूत नहीं होगी बल्कि बिहार में राजनीतिक बदलाव की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा।

इस बार प्रशांत किशोर ने अपनी चुनावी रणनीति में भी बड़ा बदलाव किया है। पहले वह बड़ी-बड़ी रैलियों पर ज्यादा जोर देते थे, लेकिन अब वह बांकीपुर में लगातार जमीन पर सक्रिय हैं। बड़ी सभाओं की जगह अब छोटी-छोटी बैठकें और माइक्रो लेवल मीटिंग्स की जा रही हैं। जन सुराज पार्टी की कोशिश है कि कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनें। वहीं, प्रशांत किशोर भी जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर शिक्षा और बच्चों के भविष्य जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं।

वैसे, जन सुराज पार्टी के लिए यह उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार में एनडीए सरकार बनने के बाद से पार्टी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अगर विकास के मुद्दे पर राजनीति नहीं होगी तो राज्य की समस्याएं और बढ़ेंगी।

अगर बांकीपुर विधानसभा सीट की बात करें, तो यह पटना शहर के अंदर आती है और भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। पिछले तीन दशकों से यहां भाजपा का दबदबा रहा है। 2008 के परिसीमन से पहले यह क्षेत्र पटना पश्चिम विधानसभा सीट का हिस्सा था। 1995 में भाजपा नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से विधायक बने और लगातार चार बार चुनाव जीते। 2006 में उनके निधन के बाद उनके बेटे नितिन नवीन ने उनकी राजनीतिक विरासत संभाली। परिसीमन के बाद उन्होंने बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ा और 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज की।

बांकीपुर सीट की एक और खास बात यह है कि यहां का चुनाव मुख्य रूप से शहरी मतदाता तय करते हैं। हालांकि, यह बिहार की उन सीटों में शामिल है जहां मतदान प्रतिशत सबसे कम रहता है। 2025 के विधानसभा चुनाव में यहां सिर्फ 41.3 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसी चुनाव में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार बांकीपुर सीट पर तीसरे स्थान पर रहे थे।

अब प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने अपना पूरा राजनीतिक संचालन भी पटना से बाहर बिहार नवनिर्माण आश्रम (बिहटा) में शिफ्ट कर दिया है। इसका मकसद संगठन को मजबूत करना और समर्पित कार्यकर्ताओं की नई टीम तैयार करना है।

ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर का उतरना साफ संकेत देता है कि वह भाजपा के शहरी गढ़ में सीधी चुनौती देने की तैयारी में हैं। वहीं, जन सुराज पार्टी के लिए भी यह उपचुनाव बड़ी परीक्षा है क्योंकि इसी चुनाव के जरिए उसे बिहार की जनता के सामने अपने नए राजनीतिक मॉडल की स्वीकार्यता साबित करनी होगी।

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