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कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा- दार्जिलिंग में हालात को काबू में करने के लिए केंद्र भेजे CRPF की चार कंपनियां

दार्जिलिंग, कलीमपोंग और सोनदा में सेना को तैनात किया गया है। गोरखालैंड मूवमेंट को-ऑडिनेशन कमेटी (एमजीसीसी) ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव के कारण 15 जुलाई से आमरण अनशन नहीं करने का निर्णय लिया है।

Author Updated: July 14, 2017 6:34 PM
पर्वतीय क्षेत्र में अलग राज्य की मांग को लेकर पिछले एक महीने से अनिश्चितकालीन बंद जारी है। (PTI Photo)

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के पर्वतीय क्षेत्र में हिंसा पर अंकुश लगाने के लिए केन्द्र को दार्जिलिंग में सीआरपीएफ की अतिरिक्त चार कंपनियां भेजने का शुक्रवार (14 जुलाई) को निर्देश दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश निशिता म्हात्रे और न्यायमूर्ति टी चक्रबर्ती की पीठ ने केन्द्र से वहां पहले से तैनात केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 11 कंपनियों के अतिरिक्त सीआरपीएफ के बल प्रदान करने को कहा। अदालत ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया कि वह पर्वतीय इलाकों में हालात सामान्य बनाने के लिए अपने संसाधनों से अतिरिक्त बल प्रदान करे। पर्वतीय क्षेत्र में अलग राज्य की मांग को ले कर पिछले एक महीने से अनिश्चितकालीन बंद जारी है।

अदालत ने गोरखा आंदोलन से लोगों को होने वाली दिक्कतों पर बार बार चिंता जताई। केन्द्र सरकार ने सीआरपीएफ की तीन महिला कंपनियों को बदलने के पश्चिम बंगाल सरकार की मांग के जवाब में हलफनामा के माध्यम से आज कहा कि बलों की महिला सदस्यों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है।

अशांत दार्जिलिंग पहाड़ियों से एसएसबी की तीन कंपनियों को इस आधार पर बदले जाने की राज्य सरकार की मांग कि वे स्थानीय लोगों को जानते हैं, केन्द्र ने जवाब दिया कि यह बदले जाने के लिए उचित कारण नहीं है क्योंकि एसएसबी बिना भेदभाव के काम करती है। पश्चिम बंगाल के महाधिवक्ता और केन्द्र के अतिरिक्त सालिसिटर जनरल की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने दार्जिलिंग और कलिमपोंग जिलों में पहले से तैनात 11 कंपनियों के अतिरिक्त सीआरपीएफ की चार कंपनियां तैनात करने का निर्देश दिया।

बता दें कि पश्चिम बंगाल के पर्वतीय क्षेत्र में पृथक राज्य की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल के आज 30 दिन पूरे हो गए। शुक्रवार को दार्जिलिंग में एक रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कार्यालय, एक पुलिस चौकी और एक सरकारी पुस्तकालय में आग लगा दी गयी। पुलिस ने ?बताया कि इंटरनेट सेवा आज 27 दिन भी ठप्प है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गोरखालैंड समर्थकों ने कल रात कुरसेओंग में आरपीएफ कार्यालय और सुखियापोचखरी में एक पुलिस चौकी में आग लगा दी गयी जबकि मिरिक उप संभाग में एक सरकारी पुस्तकालय में आज तड़के आग लगा दी गयी।

दार्जिलिंग, कलीमपोंग और सोनदा में सेना को तैनात किया गया है। गोरखालैंड मूवमेंट को-ऑडिनेशन कमेटी (एमजीसीसी) ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव के कारण 15 जुलाई से आमरण अनशन नहीं करने का निर्णय लिया है।
जीएसीसी के एक सदस्य ने ‘पीटीआई’ को बताया, ‘‘राष्ट्रपति चुनाव के नजदीक होने के कारण हमने आमरण अनशन नहीं करने का निर्णय लिया है। इस बारे में हम 18 जुलाई को होने वाले अगली सर्वदलीय बैठक में निर्णय लेंगे।’’उल्लेखनीय है कि 30 सदस्यीय जीएमसीसी में जीजेएम और जीएनएलएफ और जेएपी सहित पहाड़ी की सभी पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

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