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बंगालः पड़ोसी सूबों के मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा बंद

इलाज के लिए पड़ोसी राज्यों से पश्चिम बंगाल आने वाले मरीजों को अब सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी। ममता बनर्जी सरकार ने वित्तीय तंगी की के कारण यह सुविधा सिर्फ राज्य के लोगों तक ही सीमित रखने का फैसला किया है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मुफ्त इलाज की सुविधा हासिल करने वाले मरीजों में से 20 फीसद बाहरी हैं। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे ज्यादातर मरीज बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बांग्लादेश व नेपाल से यहां आते हैं।

इलाज के लिए पड़ोसी राज्यों से पश्चिम बंगाल आने वाले मरीजों को अब सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी। ममता बनर्जी सरकार ने वित्तीय तंगी की के कारण यह सुविधा सिर्फ राज्य के लोगों तक ही सीमित रखने का फैसला किया है। इससे हर महीने पड़ोसी बिहार, ओड़ीशा, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों से यहां पहुंचने वाले मरीजों के लिए दिक्कत पैदा हो गई है। ऐसे मरीजों को बीते तीन साल से सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही थी। इस वजह से बाहरी राज्यों से इलाज के लिए खासकर कोलकाता पहुंचने वाले मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही थी। इसके साथ ही सरकार ने अब अस्पतालों की छवि सुधारने की कवायद भी शुरू की है।

बंगाल के सरकारी अस्पतालों पर लापरवाही, इलाज में कोताही के आरोप लगते रहे हैं। मरीजों के साथ दुर्वयवहार के मामले में भी अक्सर सामने आते रहते हैं। मुख्यमंत्री ने माना है कि इससे सरकारी अस्पतालों की छवि धूमिल हुई है। उनका दावा है कि सरकार अब इस स्थिति को सुधारने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जिम्मे स्वास्थ्य मंत्रालय भी है। ममता कहती हैं कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा अपने आप में अनूठी है। लेकिन बीते कुछ वर्षों से पड़ोसी राज्यों के अलावा पड़ोसी देशों से मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है। तृणमूल सरकार ने वर्ष 2015 में सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों के मुफ्त इलाज का ऐलान किया था। अंतर यही है कि पहले जहां इलाज पूरी तरह मुफ्त था वहीं अब उनको इसके लिए भुगतान करना होगा। ममता बताती हैं कि मुफ्त इलाज के हकदार लोगों को एक खास कार्ड दिया जाएगा। यह सिर्फ बंगाल के लोगों को ही मिलेगा।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मुफ्त इलाज की सुविधा हासिल करने वाले मरीजों में से 20 फीसद बाहरी हैं। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे ज्यादातर मरीज बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बांग्लादेश व नेपाल से यहां आते हैं। ममता का कहना है कि राज्य के सरकारी डॉक्टर रोजाना दो लाख मरीजों को देखते हैं। सरकारी क्षेत्र में अब 14 सौ डॉक्टर हैं। इसके अलावा 21 हजार नई नर्सों की बहाली की गई है, लेकिन बावजूद इसके अब भी इस क्षेत्र में डॉक्टरों की कमी है। मुख्यमंत्री का दावा है कि आठ साल पहले स्वास्थ्य विभाग का बजट महज 571 करोड़ रुपए था जो अब बढ़ कर 8,771 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

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