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टॉलीगंज में है सितारों की जंग

रे, ऋत्विक घटक, मृणाल सेन, ऋतुपर्णो, गौतम घोष जैसे दिग्गजों की कार्यस्थली के बीच से निकलता है बजबजाता गंदा नाला, आदिगंगा जो ममता के घर के पीछे से भी गुज़रता है।

Author Translated By अजय शुक्ल कोलकाता | Updated: April 9, 2021 1:04 PM
west bengal, tollywoodटॉलीवुड की अभिनेत्री सरबंती चटर्जी के साथ बाबुल सुप्रियो, पायल सरकार फोटो क्रेडिट- एक्सप्रेस, शशि घोष

बंगाल में चुनावी रणभूमि इस बार सितारों से जड़ी है। फिल्म और टीवी जगत के सितारे! दोनों ही पालों में। सितारों का यह खेल टॉलीवुड के हृदय यानी टॉलीगंज पहुंच कर और भी दिलचस्प हो गई है। आप जानते ही हैं कि टॉलीगंज दक्षिण कोलकाता का एक विधानसभा क्षेत्र भी है। वहां, कल यानी 10 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।

टीएमसी इस सीट को अपना अभेद्य दुर्ग मानती है। माने भी क्यों न, टीएमसी यह सीट 2001 से लगातार जीतती आई है। तीन बार से तो अरूप बिश्वास ही जीतते रहे हैं। वे पीडब्ल्यूडी के मंत्री भी हैं। भाजपा ने उनके सामने अपना बहुत बड़ा सितारा बाबुल सुप्रियो को उतारा हुआ है। बाबुल भाजपा के सांसद और मंत्री होने के साथ एक ऐसे गायक भी हैं, जो पूरे भारत में लोकप्रिय हैं। इस सीट के तीसरे दावेदार हैं देबदूत घोष। अभिनेता हैं और खूब लोकप्रिय भी। घोष को संयुक्त मोर्चे ने उतारा है।

नवयथार्थवादी कहानियों वाली, टॉलीवुड के नाम से मशहूर बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री को कभी वामपंथी झुकाव वाला माना जाता था। आपको याद होगा कि पूर्व सीएम बुद्धदेब भट्टाचार्य सूचना और प्रसारण मंत्रालय अपने ही पास रखा करते थे।

टॉलीवुड के साथ टीएमससी का रिश्ता स्थानीय बाहुबली बिश्वास के जरिए बना। कालांतर में देव, मुनमुन सेन, शताब्दी राय, चिरंजीत चट्टोपाध्याय, मिमी चक्रबर्ती और नुसरत जहां सरीखे फिल्मी सितारे पाला बदल कर टीएमसी के खेमे में आए। इनमें से कई को विधानसभा और लोकसभा, दोनों के लिए मैदान में उतारा गया। टीएमसी की सत्ता के दस वर्षों के दौरान राज्य सरकार के सांस्कृतिक आयोजनों और 11 जुलाई को होने वाली पार्टी की वार्षिक शहीद दिवस रैली में फिल्मी सितारे मंच पर हमेशा जगमगाते रहे हैं।

टीएमसी इस बार विभिन्न सीटों से अनेक फिल्मी सितारों को चुनाव लड़ा रही है। इनमें सोहम चक्रबर्ती, सायनिका बनर्जी, कौशमी मुखर्जी, जून मलिया, लवली मोइत्रा, सायनी घोष, फिल्म निर्माता राज चक्रबर्ती और गायक अदिति मुंशी शामिल हैं। इनके अलावा सपा सांसद और अभिनेत्री जया बच्चन भी पार्टी के चुनाव प्रचार में लगी हैं।

अब बात भाजपा की। तो, यह पार्टी भी टॉलीवुड सितारों को बटोरने में जुटी रही है। अनेक कलाकार भाजपा में शामिल हुए हैं। इनमें पायल सरकार, श्रबंती चटर्जी, यश दासगुप्ता, पपिया अधिकारी, तनुश्री चक्रबर्ती और अंजना बसु तो पार्टी के टिकट से चुनाव भी लड़ रही हैं। उधऱ, बॉलीवुड के पुराने हीरो मिथुन चक्रबर्ती फिल्मी बिरादरी के भाजपा प्रत्याशियों के प्रचार में जुटे हैं। मिथुन 7 मार्च को बड़े धूम-धड़ाके के साथ भाजपा में शामिल हुए थे।

जुलाई 2019 में बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष की मौजूदगी में एक नए संगठन को शुरू किया गया था। नाम था ईस्टर्न इंडिया मोशन पिक्चर्स एण्ड कल्चरल कनफेडरेशन। इस संगठन का मकसद था टॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वालों के हितों की रक्षा करना। घोष अगर इस संगठन से जुड़े हैं तो टीएमसी विधायक बिश्वास और उनके भाई स्वरूप बिश्वास ईस्टर्न इंडिया मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ सिने टेक्नीशियन्स और वर्कर्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया जैसे संगठनों में मुख्य पद संभाल रहे हैं।

सुप्रियो का दावा है कि वे 40-50 हजार वोटों से चुनाव जीत रहे हैं। उनका आरोप है, “अरूप बिश्वास और उनके भाई स्वरूप का बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री और इस विधानसभा क्षेत्र में राज है। उनकी हां के बिना यहां कुछ नहीं होता। नतीजतन, लोग कष्ट झेल रहे हैं। यह बड़ी दुखद बात है। लोगों को, खासतौर पर स्लम एरिया के लोगों को पीने का साफ पानी मुहैया कराने की ज़रूरत है। टॉली-नाला यानी कैनाल की भी सफाई होनी है।”

टॉलीगंज में अगर यह बजबजाता नाला मौदूद है, जिसे पहले कभी आदिगंगा कहते थे तो मशहूर टेक्नीशियन्स स्टूडियो, इंद्रपुरी स्टूडियो और न्यू थियेटर्स वन जैसे स्टूडियो भी हैं, जहां सत्यजित रे, मृणाल सेन, ऋत्विक घटक, गौतम घोष और रितुपर्णो घोष जैसे दिग्गज फिल्में बनाते थे। ये दो छवियां बड़ा ही विरोधाभासी है।

यह नाला फिल्म इंडस्ट्री की हृदयस्थली के अलावा कालीघाट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर के पीछे से भी गुजरता है। इस नाले में सीवर का पानी और दूसरी गंदगी गिरती है। बगैर परिशोधन के। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कुछ साल से दखल देता आया है। लेकिन, सब बेकार। कोई फर्क नहीं।

क्षेत्र के लोग बताते हैं कि जब हुगली में ज्वार आता है तो नाला आसपास के इलाकों में ओवरफ्लो करने लगता है। इससे स्लम में रहने वाले सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

टीएमसी के मौजूदा विधायक बिश्वास ऐसा नहीं मानते। दावा करते हैं कि ममता ने पानी, बिजली, सड़क आदि विकास का हर काम कराया है। 2016 में बिश्वास पौने दस हजार वोटों से जीते थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा ने बंगाल में बढ़िया प्रदर्शन किया था, तब भी टॉलीगंज में वोटों के मामले में टीएमसी ही आगे रही थी।

टीएमसी इस बार अपने अभियान में भाजपा को बाहरी पार्टी के रूप में भी प्रचारित कर रही है। कहा करती है कि टॉलीगंज में बंगाली कल्चर के संरक्षक कभी भी भाजपा जैसे दल को वोट नहीं करेंगे।

टॉलीगंज से संयुक्त मोर्चा प्रत्याशी हैं देबदूत घोष। वे दस साल से बतौर अभिनेता काम करते आए हैं। अपने नामी-गिरामी प्रतिद्वंद्वियों के विपरीत उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को बहुत नज़दीक से देखा-जाना है। वे कहते हैं, “मैं फिल्म स्टूडियोज़ का स्तर को अंतर्राष्ट्रीय ऊंचाइयों तक ले जाना चाहता हूं…यहां के स्टूडियोज़ में बंगाल के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्म निर्माता काम करते रहे हैं। इन स्टूडियोज़ की छवि बंगाली फिल्मों के स्वर्ण युग से मेल नहीं खाती।” टॉलीवुड को अंतर्राष्ट्रीय गरिमा दिलाने के इच्छुक यह प्रत्याशी क्षेत्रवासियों को मूलभूत सुविधाएं भी दिलाना चाहता है।

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