West Bengal: दुर्गापूजा के बाद खोले जा सकते हैं स्कूल-कॉलेज, सीएम ममता बनर्जी बोलीं- सरकार कर रही विचार

हालांकि कुछ दिन पहले, राज्य सरकार ने कहा था कि कोविड -19 महामारी की संभावित तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए निकट भविष्य में किसी भी स्तर पर स्कूल खोलने की कोई योजना नहीं है।

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पश्चिम बंगाल में कोविड-19 की वजह से लंबे समय से शिक्षण संस्थाएं बंद हैं। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार नवंबर में दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद स्कूलों और कॉलेजों को वैकल्पिक दिनों में खोलने पर विचार कर रही है। पिछले साल मार्च में कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद से राज्य में शैक्षणिक संस्थान बंद हैं। ममता बनर्जी ने सचिवालय में पत्रकारों से कहा, “अब तक कुछ भी तय नहीं हुआ है।” मुख्यमंत्री ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अभिजीत विनायक बनर्जी की अगुवाई वाले वैश्विक सलाहकार बोर्ड (जीएबी) की बैठक के बाद यह टिप्पणी की है।

हालांकि कुछ दिन पहले, राज्य सरकार ने कहा था कि कोविड -19 महामारी की संभावित तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए निकट भविष्य में किसी भी स्तर पर स्कूल खोलने की कोई योजना नहीं है। साथ ही अगर स्कूल-कॉलेज खोले भी जाते हैं तो सबसे पहले उच्च कक्षाओं के लिए ऑफलाइन क्लासेस चलेंगी। प्रायमरी क्लासेस चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

दूसरी तरफ इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के महानिदेशक बलराम भार्गव ने उम्मीद जताई है कि बच्चे बड़ों की अपेक्षा वायरल संक्रमण से बेहतर ढंग से निपट सकते हैं, लिहाजा स्कूलों को सुरक्षात्मक ढंग से खोला जा सकता है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि स्कूलों के शिक्षक और अन्य स्टाफ को वैक्सीन जरूर लगा हो।

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुरुवार को पत्र लिखकर आशंका जताई कि अगर राज्य में टीकों की आपूर्ति नहीं बढ़ाई गई तो कोविड की स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का आबादी घनत्व बहुत अधिक होने के बावजूद उसे टीकों की “बहुत कम खुराकें” मिल रही हैं और प्रधानमंत्री से टीकों की आपूर्ति बढ़ाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि राज्य को सभी पात्र लोगों को टीका लगाने के लिए कोविड टीकों की करीब 14 करोड़ खुराकों की जरूरत है। बनर्जी ने पत्र में लिखा, “वर्तमान में, हम हर दिन चार लाख टीके दे रहे हैं और 11 लाख खुराकें हर दिन देने की क्षमता है। फिर भी, आबादी घनत्व अधिक होने और शहरीकरण की दर ज्यादा होने के बावजूद हमें बहुत कम खुराकें मिल रही हैं।”

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