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वैक्सीन स्कैमः पुरानी फोटो में आरोपी के साथ दिखे गवर्नर तो टीएमसी ने साधा निशाना

टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि राज्यपाल और धोखेबाज आईएएस के अंगरक्षक के बीच संबंध की जांच होनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि राज्यपाल इस मामले में मौन क्यों हैं? उन्हें बोलना चाहिए।

तस्वीर में आरोपी सुरक्षाकर्मी अमिय वैद्य के साथ राज्यपाल जगदीप धनखड़ नजर आ रहे हैं। (Photo Source – NDTV)

कोलकाता में टीकाकरण के लिये फर्जी शिविर लगाने वाले देबांजन देब के साथ कथित संलिप्तता के आरोप में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है इसके साथ ही इस मामले में पकड़े गये लोगों की संख्या बढ कर सात हो गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि पकड़े गये व्यक्ति की पहचान उस फ्लैट के मालिक के रूप में की गयी है जिसे कार्यालय बनाने के लिये देब ने किराये पर लिया था। उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति को बुधवार को उत्तर 24 परगना जिले के बैराती स्थित उसके निवास से गिरफ्तार किया गया। इस बीच तृणमूल के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने गुरुवार को कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन में दो पुरानी तस्वीरें प्रदर्शित कीं। इन तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने जालसाज देबांजन देब के सुरक्षा गार्ड अमिय वैद्य का संबंध राज्यपाल जगदीप धनखड़ से जोड़ा।

पहली तस्वीर में कोलकाता में फर्जी आईएएस बनकर वैक्सीन कैंप लगाने वाले देबंजन देब और उनके पीछे खड़े उसके अंगरक्षक की है। अंगरक्षक का नाम अमिय वैद्य ने बताया कि वह सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में जवान हुआ करता था। देबंजन देब को 23 जून को दक्षिण कोलकाता के कस्बा में लगाए गए नकली वैक्सीन शिविर का भंडाफोड़ करने के बाद गिरफ्तार किया गया था। दूसरी तस्वीर में सामने की ओर राज्यपाल जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी दो अन्य महिलाओं के साथ खड़ी हैं, जो साफ तौर पर राज्यपाल की अतिथि हैं। अतिथियों के पीछे की ओर वही सुरक्षाकर्मी खड़ा है। तस्वीर में जगह कोलकाता के राजभवन जैसी लग रही है।

टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि राज्यपाल पर निशाना साधते हुए उनके और धोखेबाज के अंगरक्षक के बीच संबंध के बारे में पूछा और कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। मामले में टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पूछा कि राज्यपाल इस मामले में मौन क्यों हैं? उन्हें बोलना चाहिए।

उधर, कोलकाता में गिरफ्तार फ्लैट मालिक के बाद में अधिकारी ने बताया, “उसने अपना कार्यालय देबांजन देब को किराये पर दिया था। ऐसा लगता है कि उसे इस बात की जानकारी थी कि लोगों को बेवकूफ बनाने के लिये देब फर्जी आईएएस अधिकारी बना है लेकिन उसने लगातार उसकी मदद की। हम लोग इस तथ्य की पुष्टि कर रहे हैं।”

उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए फ्लैट के मालिक ने “किसी तरह एक अखबार में दो खबरें प्रकाशित कराने में कामयाबी हासिल की, जिनमें से एक मिलावटी पेट्रोल की बिक्री की जांच के लिए देबांजन की कथित छापेमारी से संबंधित थी।” दूसरी खबर वह थी, जिसमें देब ने स्वयं को पश्चिम बंगाल कर्मचारी फेडरेशन का विजेता घोषित किया था। देब (28) को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था और शनिवार को उसके तीन सहयोगियों को पकड़ा गया था।

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