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भाजपा कार्यकर्ता को गांजा तस्करी में अरेस्ट करो, तृणमूल नेता का वीडियो वायरल

एंटी नारकोटिक्स लॉ के तहत एक किलो गांजा तस्करी का आरोप साबित होने पर पर छह महीने की जेल हो सकती है। अधिक मात्रा में मादक पदार्थ रखने पर 20 साल तक की जेल का प्रावधान है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वो पार्टी कार्यकर्ताओं से यह कहते हुए दिख रहा है कि भाजपा कार्यकर्ता को गांजा तस्करी में पकड़वाओ। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक बीरभूम जिले के टीएमसी जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल वीडियो में पार्टी कार्यकर्ताओं को यह कहते हुए दिखे कि पुलिस कप्तान को लाइन पर लो ताकि उसे भाजपा कार्यक्रता को दबोचने के लिए निर्देश दे सकें। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंडल वीडियो में कह रहे हैं, “क्या नाम है उस महिला का? वो बीजेपी की कार्यकर्ता है। उसकी कपड़े की एक दुकान है। उसे गांजा की तस्करी के केस में पकड़ कर गिरफ्तार करो।” जब एक कार्यकर्ता ने कहा कि उसे रोककर निगरानी में रखा जा सकता है तब मंडल ने कहा कि साफ-साफ बताओ कि तुम उसे गिरफ्तार कर कंट्रोल कर सकते हो या नहीं। मंडल का यह वीडियो रविवार (02 सितंबर) का है, जब वो कोलकाता से करीब 170 किलोमीटर दूर जिलास्तरीय पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

बता दें कि एंटी नारकोटिक्स लॉ के तहत एक किलो गांजा तस्करी का आरोप साबित होने पर पर छह महीने की जेल हो सकती है। अधिक मात्रा में मादक पदार्थ रखने पर 20 साल तक की जेल का प्रावधान है। मंडल ने वायरल वीडियो को फर्जी करार दिया है। हालांकि, किसी भी मीडिया समूह ने अब तक उस वीडियो की प्रमाणिकता को सही नहीं ठहराया है, बावजूद इसके तृणमूल खेमे में बेचैनी है। उधर, बीजेपी ने वीडियो को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर धावा बोला है और मंडल को गिरफ्तार करने की मांग की है। अनुब्रत मंडल समर्थकों के बीच केस्टो दा के नाम से मशहूर हैं।

मंडल ने वीडियो को फर्जी बताते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि किसने ये सब वायरल झूठ फैलाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें तो उस महिला का नाम भी नहीं मालूम है जिसे गिरफ्तार करने की बात की जा रही है। तृणमूल कांग्रेस की तरफ से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। राज्य के शिक्षा मंत्री और पार्टी के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि जब तक कि वह वीडियो नहीं देख लेते तब तक उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे। बता दें कि अनुब्रत मंडल पहली बार विवादों में नहीं घिरे हैं। इससे पहले साल 2013 में भी उन पर बीरभूम में पार्टी कार्यकर्ताओं को पुलिस पर बम फेंकने और पंचायत चुनावों में तृणमूल उम्मीदवारों के खिलाफ खड़ा होने वालों के घरों को जला देने का फरमान देने के आरोप लगे थे।

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