विधानसभाओं में युवाओं और महिलाओं की उपस्थिति

आयु और लिंग के आधार विश्लेषण करने पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में महिला विधायकों के अनुपात में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, केरल में यह बढ़ा है जबकि तमिलनाडु में महिला विधायकों के अनुपात में थोड़ी सी कमी दर्ज की गई है।

Politicsपार्टी की जीत पर जश्‍न मनाते डीएमके कार्यकर्ता। फाइल फोटो।

आयु और लिंग के आधार विश्लेषण करने पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में महिला विधायकों के अनुपात में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है, केरल में यह बढ़ा है जबकि तमिलनाडु में महिला विधायकों के अनुपात में थोड़ी सी कमी दर्ज की गई है। पश्चिम बंगाल में इस बार युवाओं की संख्या में इजाफा हुआ है जबकि केरल और तमिलनाडु में 40 साल से कम आयु के 10 फीसद से कम विधायक हैं।

पश्चिम बंगाल की नई विधानसभा में इस बार पिछली विधानसभा के मुकाबले कम राजनीतिक पार्टियों के विधायक चुने गए हैं। पिछली बार विधानसभा में आठ पार्टियों के विधायक थे जबकि इस बार सिर्फ तीन पार्टियों के विधायक ही चुने गए हैं। केरल और तमिलनाडु में इसका उल्टा है। तमिलनाडु में इस बार पिछली विधानसभा के मुकाबले दोगुनी पार्टियों के सदस्य चुने गए हैं।

2016 में हुए चुनाव में तमिलनाडु विधानसभा में सिर्फ चार पार्टियों के उम्मीदवार ही जीते थे लेकिन इस बार आठ पार्टियों के उम्मीदवार विधानसभा में पहुंचने में सफल रहे हैं। केरल की बात करें तो यहां की विधानसभा में कुल 140 सदस्य हैं और इस बार 16 पार्टियों के उम्मीदवार जीते हैं। वहीं, 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में 15 पार्टियों के उम्मीदवार चुने गए थे जबकि महाराष्ट्र विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 288 है।

पिछले दिनों हुए राज्य विधानसभाओं के चुनावों में कोई एक पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर पाई है, जैसे बिहार और महाराष्ट्र। इन दोनों राज्यों में कई पार्टियों की सरकारें कार्य कर रही हैं। वहीं, इसके उल्ट इस बार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अकेली पार्टी को ही बहुमत मिल गया है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को 213 और तमिलनाडु में डीएमके को 133 सीटें मिली हैं। वहीं, असम में भारतीय जनता पार्टी बहुमत से सिर्फ चार सीटें दूर रही और उसे 126 की विधानसभा में 60 सीटें मिलीं, जबकि केरल में फिर गठबंधन की सरकार सत्ता में आई है।

कम महिला विधायक

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल की बात करें तो सिर्फ केरल में ही महिला विधायकों की संख्या में थोड़ा इजाफा हुआ है। यहां पहले महिला विधायकों की संख्या आठ थी जो अब बढ़कर 11 हो गई है। पश्चिम बंगाल में महिला विधायकों की संख्या पिछली विधानसभा के बराबर 40 ही है। तमिलनाडु में महिला विधायकों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पिछली विधानसभा में यहां पर महिला विधायकों की संख्या 21 थी जबकि इस बार सिर्फ 12 महिलाएं ही विधानसभा में पहुंच पाई हैं। अगर बिहार विधानसभा चुनाव की बात करें तो यहां पर 2015 में 28 महिला विधायक बनी थीं जबकि 2020 में 26 महिलाएं विधानसभा पहुंची। इसी तरह महाराष्ट्र में 2019 में 24 महिलाएं विधायक बनीं जबकि 2014 में 20 महिला विधायक चुनी गई थीं।

विधायकों की आयु

बंगाल में 25 से 40 साल के उम्र के विधायकों की संख्या 14 फीसद तक बढ़ी है। वहीं, केरल और तमिलनाडु में युवा विधायकों की संख्या क्रमश: नौ फीसद और छह फीसद है। तमिलनाडु में 70 साल से अधिक उम्र के विधायकों की संख्या में इजाफा हुआ है। तमिलनाडु विधानसभा में 15 विधायकों की आयु 70 साल से अधिक है। डीएमके के दुराईमुरुगन सबसे बुजुर्ग विधायक है, उनकी आयु 83 साल है।

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