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हिन्‍दू मटन खाएं या नहीं? त्रिपुरा गवर्नर से भिड़े नेताजी के पड़पोते

सुभाष चंद्र बोस के पड़पोते चंद्र कुमार बोस ने कहा कि यदि आप लोगों को गोमांस खाने की अनुमति नहीं देते हैं तो बकरी का मांस खाने से रोकें। राजनीति के साथ धर्म को न मिलाएं। राजनीति का किसी भी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।

सुभाष चंद्र बोस के पड़पोते चंद्र कुमार बोस (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

देश में लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं और बीफ की खपत पर छिड़ी बहस के बीच नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पड़पोते और पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उपाध्यक्ष चंद्र कुमार बोस द्वारा बकरी के मांस को लेकर किए गए ट्वीट के बाद इस पर नई बहस शुरू हो गई है। उनके और त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत राय के बीच शब्द युद्ध शुरू हो गया है। दरअसल, चंद्र कुमार बोस ने कहा कि बकरी, गाय के समान है। हिंदुओं को इसे माता के समान मानना चाहिए। उन्होंने अपनी बात को साबित करने के लिए महात्मा गांधी और उनके खाने की आदत को सामने रखा। कहा कि हिंदू को बकरी का मांस खाना बंद करना चाहिए क्योंकि राष्ट्रपिता इसे ‘माता’ की तरह मानते थे। बोस ने कहा कि जब महात्मा गांधी उनके दादा शरत चंद्र बोस के घर पर कोलकाता में ठहरे थे तो बकरी के दूध का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि, “महात्मा गांधी जब हमारे दादा शरत चंद्र बोस के कोलकाता के वुडवर्न पार्क 1 स्थित घर पर ठहरे थे, उन्होंने बकरी के दूध की मांग की थी। इसके लिए दो बकरी की खरीद हुई थी। महात्मा गांधी ने बकरी के दूध का इस्तेमाल कर उसे माता के रूप में दर्जा दिया। हिंदुओं ने बकरी के मांस खाना छोड़ दिया था।”

बोस के इस बयान पर त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत राय ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि न गांधी जी और न हीं सुभाष चंद्र बोस बकरी को कभी माता का दर्जा दिए। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, ” न तो कभी गांधी जी और न हीं आपके दादा जी ने कभी गाय को माता कहा। न हीं गांधी जी या किसी और ने कभी खुद को हिंदुओं का रक्षक बताया। हम हिंदू गाय को अपनी माता के समान मानते हैं, बकरी को नहीं। कृप्या इस तरह की बातों से परेशान न करें।”

हालांकि, बोस ने अपने विचार का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने गांधीजी के संदर्भ को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा कि, “किसी को मेरे ट्वीट के सूक्ष्मता और अर्थ को समझना चाहिए। राजनीतिक बिरादरी के लोगों को मैं संदेश देना चाहता हूं कि धर्म को राजनीति के साथ न मिलाएं। हमें जानवरों की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन मनुष्यों की कीमत पर नहीं।”

बोस के इस ट्वीट से यह साफ पता चल रहा है कि वे  हाल के दिनों में हुई लिंचिंग की घटनाओं पर बोल रहे थे, जिनमें गाय तस्करी के संदेह में कई लोगों की हत्या कर दी गई। इसके साथ की सोमवार को किए एक और ट्वीट में बोस ने कहा कि लोगों को यह नहीं बताया जाना चाहिए कि क्या खाना चाहिए? उन्होंने गोमांस और बकरी के मांस को एक समान बताया। कहा कि, ” यह समय चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में रखने का है! लोगों को बताएं कि उन्हें क्या खाना चाहिए। यदि आप लोगों को गोमांस खाने की अनुमति नहीं देते हैं तो बकरी का मांस खाने से रोकें। राजनीति के साथ धर्म को न मिलाएं। राजनीति का किसी भी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।”

मंगलवार को पश्चिम  बंगाल के प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष ने बताया कि क्यों वह बकरी को एक पवित्र पशु मानाते हैं? उन्होंने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि, “मैंने इसे एक उदाहरण के रूप में बताने की कोशिश की। देश के कई हिस्सों में देवी काली की पूजा के दौरान बकरियों का बलिदान दिया गया था। अगर बकरी एक पवित्र जानवर नहीं है तो इसका इस्तेमाल काली की पूजा के दौरान क्यों किया जाता था। उस तर्क से हमें बकरी का मांस नहीं खाना चाहिए।”

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