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पश्चिम बंगाल में मेधावी छात्रों को मिलेगी मदद

कोलकाता। इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई करने वाले वैसे छात्र जो संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठने के इच्छुक तो होते हैं लेकिन उन्हें आर्थिक परेशानियां होती हैं, उनके लिए जिला प्रशासन और एक गैरसरकारी संस्था ने ‘लक्ष्यभेद’ नाम से संयुक्त पहल की है। बीरभूम जिला के पूर्व जिलाधीश सौमित्र मोहन ने डॉ. अभिजीत चौधरी के […]

Author Published on: October 9, 2014 2:37 PM

कोलकाता। इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई करने वाले वैसे छात्र जो संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठने के इच्छुक तो होते हैं लेकिन उन्हें आर्थिक परेशानियां होती हैं, उनके लिए जिला प्रशासन और एक गैरसरकारी संस्था ने ‘लक्ष्यभेद’ नाम से संयुक्त पहल की है।

बीरभूम जिला के पूर्व जिलाधीश सौमित्र मोहन ने डॉ. अभिजीत चौधरी के कोलाकाता आधारित लिवर फाउंडेशन के साथ वर्ष 2010 में इसकी शुरूआत की थी। कार्यक्रम के जरिए सूचीबद्ध जरूरतमंद छात्रों को मुफ्त प्रशिक्षण और कोचिंग मुहैया करायी जाती है।

अब इस पहल का उत्तरी 24-परगना, मुर्शिदाबाद और पुरूलिया जिलों में भी विस्तार हुआ है, वहीं बाकी के जिला प्रशासनों ने बुनियादी मदद की पेशकश की है जबकि इसके लिए वित्तीय आपूर्ति का प्रबंधन फाउंडेशन करता है।

मोहन ने दावा किया कि हालांकि इसकी शुरूआत चार वर्ष पहले हुई थी लेकिन अब तक ‘लक्ष्यभेद’ द्वारा प्रशिक्षित 100 से अधिक छात्र पहले ही इंजीनियरिंग और मेडिकल की संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) में सफलता हासिल कर चुके हैं।

मोहन वर्तमान में बर्दवान के जिलाधीश :डीएम: हैं। उन्होंने वर्ष 2010 के समय को याद करते हुए बताया कि जब वे बीरभूम में डीएम थे तब उनकी मुलाकात चौधरी से हुई थी। चौधरी देश के एक जाने माने लीवर प्रत्यारोपण विशेषज्ञ (लिवर ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट) हैं। उन्होंने ही इस तरह की संस्था स्थापित करने का विचार रखा था।

शुरूआत में ‘लक्ष्यभेद’ सिर्फ मेडिकल जेईई के इच्छुक छात्रों को ही मदद प्रदान करता था लेकिन बाद में इसने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी अपना विस्तार किया।

मोहन ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 50 छात्रों – मेडिकल और इंजीरियरिंग दोनों से 25-25 छात्रों का स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिए चुनाव होता है, जिसका आयोजन जनवरी और फरवरी के महीने में होता है।

मोहन ने बताया कि स्क्रीनिंग टेस्ट उन छात्रों का लिया जाता है जिन्होंने दसवीं की परीक्षा में करीब 75 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं । हालांकि अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों के लिए आरक्षण की व्यवस्था भी है।

लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद छात्रों का साक्षात्कार लिया जाता है जहां प्रतिभा, प्रेरणा और आर्थिक पृष्ठभूमि को जाना जाता है । इसके आधार पर ही उनका चुनाव होता है।

गणितज्ञ आनंद कुमार ने वर्ष 2002 में ‘सुपर 30’ नाम से इसी तरह का कार्यक्रम शुरू किया था जिसे काफी सराहा गया और संस्थान की तरफ से आईआईटी की परीक्षा में शामिल हुए 360 छात्रों में 308 छात्रों ने सफलता पाई। यहां कोचिंग के अलावा छात्रों को भोजन और रहने की जगह मुफ्त दी जाती है।

 

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