West bengal: Children Increase for Madrasas taleem Due to Technology - Jansatta
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Tech के कारण क्लास में तालीम के लिए आने लगे मदरसों के बच्चे

मदरसा ने पठन पाठन में प्रौद्योगिकी को समेकित करने के लिए नया शैक्षणिक ढांचा 2014 में स्वीकार किया था और तब से पांचवी जमात में छात्रों की संख्या दोगुनी हो गयी है।

Author सीतापुर (पश्चिम बंगाल) | August 26, 2016 1:57 PM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।

पश्चिम बंगाल के कई मदरसों में आधुनिक शिक्षा के साथ प्रौद्योगिकी के माध्यम से दीनी तालीम को जोड़ने के कारण छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ये वह मदरसे हैं जहां या तो छात्रों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी या वे कक्षाओं में आते ही नहीं थे। विटामिन पर विज्ञान की कक्षा के बाद नौवीं जमात में पढ़ने वाला अब्दुल लश्कर इंटरनेट पर पैगंबर मोहम्मद के खाने पीने की आदतों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हुगली जिले में यहां के दार-उन-नेदा सिद्दिकिया मदरसे में स्थित नई कंप्यूटर लैब में गया। उसे तथा उसके सहपाठियों को डिजिटल कहानी के जरिए पता चला कि पैगम्बर मोहम्मद अपने पसंदीदा आहार के जरिए अपने शरीर की विटामिन और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करते थे।

मदरसा के शिक्षक सुगता डे ने बताया, ‘अगर पोषण के बारे में हमारे बताने पर उन्हें (छात्रों को) वह दिलचस्प नहीं लगता तो इसे जब इस्लाम से जोड़ा जाता है। तब यह विषय उनके लिए दिलचस्प हो जाता है। इससे उन्हें अपनी शिक्षा को उस समुदाय के साथ जोड़ने में मदद मिलती है जिससे वह ताल्लुक रखते हैं।’ टाटा ट्रस्ट की शिक्षाविद अमीना चरनिया ने ‘दीनी तालीम’ (धार्मिक) और ‘दुनियावी तालीम’ (वैश्विक शिक्षा) को आधुनिक प्रौद्योगिकी से जोड़ने विचार दिया था जो सफल प्रतीत हो रहा है।

मदरसा ने पठन पाठन में प्रौद्योगिकी को समेकित करने के लिए नया शैक्षणिक ढांचा 2014 में स्वीकार किया था और तब से पांचवी जमात में छात्रों की संख्या दोगुनी हो गयी है। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के विकास पर काम कर रहे विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्सेज सोसायटी की बबीता दत्त मजुमदार ने कहा, ‘अब बच्चे बीच में ही पढ़ाई नहीं छोड़ रहे हैं। नामांकन में भी वृद्धि हुई है और इसलिए कक्षाओं में उपस्थिति भी है।’

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