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ममता का आरोप- NRC से बंगाली बोलने वालों और बिहार‍ियों को जानबूझकर बाहर कर रही मोदी सरकार

ममता बनर्जी ने कहा कि एक गेम प्लान के तहत लोगों को अलग थलग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "लोग अपने ही मुल्क में शरणार्थी हो गये हैं, यह बंगाली बोलने वाले और बिहार के लोगों को बाहर भेजने का प्लान है।" ममता बनर्जी ने कहा कि केन्द्र ने जिन 40 लाख लोगों का नाम नागरिकता सूची में शामिल नहीं किये हैं क्या उन लोगों के पुनर्वास के लिए केन्द्र के पास कोई प्लान है।

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राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के अंतिम मसौदे में 40 लाख आवेदकों के नाम शामिल नहीं किए जाने के मुद्दे पर चिंता जाहिर करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार (30 जुलाई) को कहा कि वे ‘‘भारतीय नागरिक’’ अपनी ही जमीन पर ‘‘शरणार्थी’’ हो गए हैं। ममता ने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार ‘‘वोट बैंक की राजनीति’’ कर रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि एक गेम प्लान के तहत लोगों को अलग थलग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “लोग अपने ही मुल्क में शरणार्थी हो गये हैं, यह बंगाली बोलने वाले और बिहार के लोगों को बाहर भेजने का प्लान है।” ममता बनर्जी ने कहा कि केन्द्र ने जिन 40 लाख लोगों का नाम नागरिकता सूची में शामिल नहीं किये हैं क्या उन लोगों के पुनर्वास के लिए केन्द्र के पास कोई प्लान है। उन्होंने कहा कि अंत में पश्चिम बंगाल ही है जिन्हें इन लोगों का बोझ सहना पड़ेगा।

ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘मैं पार्टी के सांसदों की एक टीम असम भेज रही हूं और जरूरत पड़ी तो मैं भी वहां जाऊंगी।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या पश्चिम बंगाल सरकार उन लोगों को आश्रय देगी जिनके नाम एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं हैं, इस पर ममता ने कहा, ‘‘उनके अपने घर हैं…वे असम के निवासी हैं। यदि वे आना चाहेंगे तो हम इस बारे में सोचेंगे। लेकिन उन्हें निकाला ही क्यों जाए? वे भारतीय हैं, लेकिन वे अपने ही देश में शरणार्थी बन गए हैं।’’ ममता ने यह दावा भी किया कि कुछ ऐसे लोगों के भी नाम अंतिम मसौदे से हटा दिए गए हैं जिनके पास पासपोर्ट, आधार और वोटर कार्ड हैं।

केंद्र पर 40 लाख लोगों को जबरन निकालने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा, ‘‘यह गंभीर चिंता की बात है। इंटरनेट सेवाएं खत्म कर दी गई हैं। हम असम में लोगों से संपर्क नहीं कर पा रहे।’’ कड़ी सुरक्षा के बीच आज एनआरसी का अंतिम मसौदा प्रकाशित किया गया। इसमें 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.89 करोड़ के नाम शामिल किए गए हैं।

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