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पश्चिम बंगालः जलमार्ग- नौका का सफर यानी जान का डर

सिटी ऑफ जॉय यानी महानगर कोलकाता के अलावा आसपास के जिलों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए लोग बस, ट्राम, टैक्सी, ऑटो, टोटो, हाथ रिक्शा व साइकिल रिक्शा जैसे सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।

Author कोलकाता। | July 4, 2018 06:07 am
राज्य के कई फेरीघाटों में संसाधनों का खासा अभाव है, जिस वजह जलमार्ग से यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है।

शंकर जालान

‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’, ‘कभी नहीं से बेहतर अभी नहीं’, ‘दुर्घटना से देर भली’ हादसों के प्रति लोगों को जागरूक करती ऐसी तख्तियां महानगर कोलकाता की कई सड़कों के अलावा राज्य के तमाम फेरीघाटों में लगी मिल जाएंगी, लेकिन अपने गंतव्य तक जल्द पहुंचने को आतुर यात्री इन तख्तियों को न केवल नजरअंदाज करते हैं, बल्कि कभी-कभार तो अति लापरवाही की वजह से अपनी जान से भी हाथ धो बैठते हैं। सिटी ऑफ जॉय यानी महानगर कोलकाता के अलावा आसपास के जिलों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए लोग बस, ट्राम, टैक्सी, ऑटो, टोटो, हाथ रिक्शा व साइकिल रिक्शा जैसे सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।

वहीं हजारों लोग जलमार्ग के सहारे भी अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। राज्य के कई फेरीघाटों में संसाधनों का खासा अभाव है, जिस वजह जलमार्ग से यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। कहीं यात्री की गलती रहती है, कहीं नाविक की और कहीं-कहीं फेरी सेवा संचालन करने वाली कंपनियों की। बात अगर बीते डेढ़ दशक की करें तो इन पंद्रह सालों में राज्य के विभिन्न जिलों में जलमार्ग के रास्ते 16 हादसे हुए हैं, जिसमें 105 लोगों की मौत हो गई और पौने दो सौ से ज्यादा लोग आज तक लापता हैं। बारिश के दिनों में जलमार्ग पर हादसों यानी नौका डूबने या पलटने की आशंका और बढ़ जाती है। जानकारों के मुताबिक क्षमता से अधिक यात्री बैठाने के कारण ही ऐसे हादसे होते हैं।

इतने हादसों के बाद भी न प्रशासन चुस्त हुआ और न ही लोग (यात्री) सचेत हुए। हां, इतना जरूर है कि किसी बड़े हादसे के बाद नौका से सफर के दौरान लाइफ जैकेट पहनने की हिदायत दी जाती है और हादसे के आठ-दस दिनों तक कुछ सख्ती बरती जाती है और इसके बाद वही घोड़ा और वही मैदान यानी स्थिति पूर्ववत हो जाती है। बीते 15 सालों के दौरान मुर्शिदाबाद जिले के नवादा, नदिया जिले के नवद्वीप, दक्षिण चौबीस परगना जिले के बजबज, नामखाना, पुजाली इंदिरा घाट और मुरीगंगा, महानगर के बाबूघाट, पूर्व मेदिनीपुर जिले के रुपनारायण नदी, हावड़ा जिले के बेलूड़, हुगली जिला के कालीबारी घाट और भद्रेश्वर, पुरुलिया जिले के दामोदर नदी, मालदा जिले के धर्मपुर घाट और शिमुलतल्ला, बर्दवान जिले के कालना में जलमार्ग पर हादसे हुए।

इस बाबत जानकारों का कहना है कि लोग बिना किसी सुरक्षा के भुटभुटी (नौका) की सवारी कर रहे हैं। वहीं, जलमार्ग से यात्रा करने वालों का तर्क है कि ज्यादातर फेरीघाट पर लाइफ जैकेट उपलब्ध ही नहीं हैं। वैसे बीते साल 26 अप्रैल को हुगली में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने लोगों को लाइफ जैकेट देने की पहल शुरू की। सेवड़ाफुली से बैरकपुर नौका से यात्रा करने वाले लोगों को लाइफ जैकेट दिए जाते हैं, लेकिन जल्दबाजी की वजह से यात्री पहनने से इनकार कर देते हैं। एक कर्मचारी ने बताया कि 50 यात्री में पांच-छह यात्री ही जैकेट लेते और पहनते हैं। लोग खुद भी लापरवाही करते हैं। सूत्र बताते हैं कि सरकार इस दिशा में परिवहन विभाग जल्द ही कुछ योजनाओं को कार्यांवित करेगा।

राज्य के परिवहन मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बीते दिनों एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से कहा था कि जलपथ का विकास करने के साथ ही यहां सुरक्षा व्यवस्था को भी दुरुस्त किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में परिवहन मंत्री ने कहा- फिलहाल अभी कुछ जगहों पर लाइफ जैकेट के इस्तेमाल के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर जैकेट का इस्तेमाल अनिवार्य करने के लिए नियम लागू किया जाएगा। जैकेट नहीं पहनने वाले यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हादसों की मुख्य वजहें

  1. नौका में क्षमता से अधिक यात्रियों का चढ़ना
  2. लाइफ जैकेट का सही इस्तेमाल नहीं होना
  3. कुछ जगहों पर लाइफ जैकेट नहीं मिलना
  4. आपात स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था का ना होना
  5. पुरानी भुटभुटी (नाव) की बदहाल स्थिति

नौका दुर्घटनाएं

  • 6 अक्तूबर 2003 : मुर्शिदाबाद के नवादा में नौका डूबने से तीन मौत, दस लापता
  • 13 जुलाई 2006 : नदिया जिले के नवद्वीप में नौका डूबने से दो की मौत, तीन लापता
  • 18 जनवरी 2007 : दक्षिण चौबीस परगना जिले के बजबज में नौका डूबने से एक मौत
  • 14 फरवरी 2009 : महानगर के बाबूघाट में नौका डूबने से दो की मौत
  • 3 जनवरी 2010 : पूर्व मेदिनीपुर जिले के रूपनारायण नदी में नौका डूबने से 15 लापता
  • 31 अक्तूबर 2010 : दक्षिण चौबीस परगना जिले के मुरीगंगा में नौका डूबने से 68 मौत, 87 लापता
  • 19 जनवरी 2011 : बेलूड़ से दक्षिणेश्वर जा रही नौका डूबने से 12 लापता
  • 12 मई 2012 : हुगली जिला के कालीबारी घाट में नौका डूबने से दो मौत, तीन लापता
  • 2 मार्च 2013 : पुरुलिया जिले के दामोदर नदी में नौका डूबने से चार मौत, 15 लापता
  • 17 मार्च 2013 : दक्षिण चौबीस परगना के पुजाली इंदिरा घाट से चली नौका डूबने से तीन मौत, 10 लापता
  • 15 जून 2013 : मालदा के धर्मपुर घाट के पास नौका डूबने से नौ मौत, छह लापता
  • 3 नवंबर 2014 : बाजे कदमतल्ला घाट के पास वाटर टैक्सी पलटने एक मौत, दो लापता
  • 15 मई 2016 : बर्दवान जिले के कलना से नदिया के शांतिपुर जा रही नौका डूबने एक मौत, तीन लापता
  • 26 अप्रैल 2017 : हुगली जिले के भद्रेश्वर तेलनीपाड़ा के पास जेटी टूटने तीन की मौत, दो लापता
  • 18 मई 2017 : मालदा के शिमुलतल्ला में नौका डूबने से तीन की मौत, तीन लापता
  • 13 जून 2018 : दक्षिण चौबीस परगना जिले के नामखाना में ट्रॉलर डूबने से तीन की मौत

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