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पश्चिम बंगाल: अब खर्चों में कटौती पर जोर दे रही है तृणमूल कांग्रेस की सरकार

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार गैर-जरूरी सरकारी खर्चों में कटौती की बात तो बहुत दिनों से कह रही थी।

ममता कहती हैं कि सरकार हर साल पुराने कर्जों की अदायगी पर 47 हजार करोड़ की भारी-भरकम रकम खर्च कर रही है।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार गैर-जरूरी सरकारी खर्चों में कटौती की बात तो बहुत दिनों से कह रही थी। इसके लिए बीते दिनों मुख्य सचिव मलय दे ने एक 15-सूत्री दिशानिर्देश भी जारी किया था। लेकिन अब ममता ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। हालांकि विपक्षी राजनीतिक दलों ने इसे एक नाटक करार दिया है। हाल में यहां प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में ममता ने कड़े शब्दों में खर्च कम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सरकारी बैठकों में अब भव्य भोजन की जगह सामान्य खाने से ही काम चलाना होगा।

इसी तरह कई मंत्रालयों का जिम्मा संभालने वाले मंत्री व सचिव स्तर के अधिकारी कई वाहनों का इस्तेमाल करते रहे हैं। उनमें से भी कई को कीमती कार की सवारी का शौक है। पहले से ही भारी आर्थिक बोझ और कर्जों से लदी सरकार के लिए यह सब भारी पड़ रहा था। इसलिए ममता ने खुद इस मामले से निपटने का फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि सरकारी पैसा जनता का है। इससे मलाई खाना उचित नहीं है। उन्होंने तमाम अधिकारियों से खर्चों में कटौती कर उससे बचने वाली रकम का इस्तेमाल विकास योजनाओं पर करने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि ‘एक व्यक्ति एक कार’ की नीति अफसरों ही नहीं बल्कि मंत्रियों पर भी लागू होगी। इसके अलावा तमाम विदेशी दौरों पर तो रोक लगा ही दी गई है, विमान में भी सबको इकॉनामी क्लास में सफर करने का निर्देश दिया गया है। अफसरों व मंत्रियों के विदेश दौरों को अब ममता खुद मंजूरी देंगी। उनका कहना है कि एकाधिक मंत्रालयों का जिम्मा संभाल रहे मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी अब एक से ज्यादा कार का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। ममता कहती हैं कि ऐसे कुछ मंत्री व अधिकारी एक से ज्यादा वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सरकार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

ममता कहती हैं कि सरकार हर साल पुराने कर्जों की अदायगी पर 47 हजार करोड़ की भारी-भरकम रकम खर्च कर रही है। केंद्र ने कई योजनाओं के मद में मिलने वाली रकम में कटौती कर दी है। ऐसे में सरकार को अपने खर्चों में कटौती कर इस रकम का इस्तेमाल सार्वजनिक कल्याण के मद में करना होगा। उन्होंने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया है जो सरकारी योजनाओं की प्रगति की निगरानी करेगा। यह समिति यह सुनिश्चित करेगी कि तमाम योजनाएं तय समयसीमा के भीतर पूरी हो जाएं ताकि उनकी लागत नहीं बढ़ सके। सरकारी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने तमाम मंत्रियों को बता दिया है कि वे विभागीय खर्च पर खाने के पैकेट भी नहीं बांट सकते। अगर वे लोग अपनी जेब से ऐसा करना चाहें तो इसके लिए भी पहले मुख्यमंत्री से अनुमोदन लेना होगा।

राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि खर्चों में कटौती के ममता के फैसले के पीछे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के उन आरोपों का भी हाथ हो सकता है जो उन्होंने बीते महीने अपने बंगाल दौरे में लगाए थे। शाह ने कहा था कि केंद्रीय योजनाओं के मद में मिलने वाली रकम निचले स्तर तक पहुंचने की बजाय तृणमूल कांग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं की जेब में पहुंच जाती है। दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि अगले साल होने वाले चुनावों को देखते हुए अब जाकर सरकार को खर्चों में कटौती का ख्याल आया है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर इतने दिनों से चुप्पी साध रखी थी।

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