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सिंगुर किसानों को जमीन लौटाया जाना उन्हें नई जिंदगी देने जैसा है: मेधा पाटकर

पाटकर ने सरदार सरोवर बांध मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया।

Author कोलकाता | September 16, 2016 7:11 AM
सामाजिक कार्यकर्ता व नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर। (फाइल फोटो)

सिंगुर आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता व नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने कहा कि सिंगुर के किसानों को जमीन लौटाया जाना उन्हें नई जिंदगी देने जैसा है। पाटकर ने सरदार सरोवर बांध मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। वर्षों से चले आ रहे अपने नर्मदा बचाओ अभियान के बारे में मेधा ने कहा कि मैं नर्मदा जल सत्याग्रह (विरोध) से आ रही हूं, जहां मोदी सरकार 244 गांवों और एक शहर की हत्या करने पर तुली है। यह सांप्रदायिकता का नया रूप है। हम लगातार इस नए रूप को चुनौती दे रहे हैं और ऐसा होने नहीं देंगे, फिर चाहे वह नर्मदा हो या सिंगुर का मामला। सिंगुर के मसले पर उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला है जो ऐतिहासिक संघर्ष के बाद आया है। ये फैसला बहुत आगे जाने वाला है। यह सार्वजनिक हित के समर्थन में है और बुनियादी लोकतंत्र की जीत है।

पाटकर ने आगे कहा कि कोई भी विकास विरोधी नहीं है। सिंगुर के लोग भी विकास के विरोध में नहीं थे। उन्होंने टाटा का विरोध किया था। पैसे व बाजार के आधार पर जीने का जो अधिकार छीना जा रहा था, उन्होंने उसका विरोध किया था। उन्होंने सिंगुर के आंदोलन के दिनों को याद करते हुए कहा कि मैं तापसी मल्लिक समेत अन्य लोगों की शहादत को अभी भी नहीं भूली हूं। उस समय जब मैं सिंगुर आई थी, तब स्ट्रीट गेस्ट के रूप में आई थी और आज स्टेट गेस्ट बनकर आई हूं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अनुरोध किया कि सिंगुर के किसानों की जमीन फिर से न छीनी जाए, वे इस बात का ध्यान रखें।

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