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बंगाल: अब नगरपालिका पर नियंत्रण को लेकर हिंसा, बीजेपी-तृणमूल कार्यकर्ताओं में भिड़ंत, जमकर चले बम

इससे पहले जिले के ही कांकीनारा और भाटपारा इलाके में सोमवार को एक अस्पताल समेत कई जगह छिटपुट धमाके हुए थे।

Author नई दिल्ली | Published on: July 17, 2019 7:44 AM
तृणमूल ने विश्वास मत में जीत का दावा किया। पार्टी ने कहा कि उसे 22 सदस्यीय निकाय में 10-9 से जीत मिली है। वहीं, बीजेपी का आरोप है कि पुलिस ने उनके दो पार्षदों को वोटिंग प्रक्रिया में शामिल होने से पहले रोक लिया।

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के बनगांव इलाके में मंगलवार को हुई हिंसा के बाद धारा 144 लगा दी गई है। इसके अलावा, रैपिड ऐक्शन फोर्स और पुलिसबलों की भी तैनाती की गई है। हिंसा की वजह नगरपालिका में विश्वास मत के बाद तृणमूल और बीजेपी समर्थकों के बीच हुई झड़प है। बता दें कि इससे पहले जिले के ही कांकीनारा और भाटपारा इलाके में सोमवार को एक अस्पताल समेत कई जगह छिटपुट धमाके हुए थे।

खबर के मुताबिक, बनगाव म्यूनिसिपैलिटी दफ्तर के सामने बम फेंके गए। दोनों पक्ष एक दूसरे पर बमबाजी और हिंसा के आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, देर शाम तक किसी के घायल होने या गिरफ्तारी की खबर नहीं है। विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश पर तृणमूल ने बनगांव म्यूनिसिपैलिटी में अपना बहुमत साबित करने के लिए विश्वासमत पेश किया। इस महीने की शुरुआत में तृणमूल के 12 पार्षद बीजेपी में चले गए थे।

तृणमूल ने विश्वास मत में जीत का दावा किया। पार्टी ने कहा कि उसे 22 सदस्यीय निकाय में 10-9 से जीत मिली है। वहीं, बीजेपी का आरोप है कि पुलिस ने उनके दो पार्षदों को वोटिंग प्रक्रिया में शामिल होने से पहले रोक लिया। बीजेपी सदस्यों ने कहा कि उनके पार्षदों को कोर्ट की ओर से गिरफ्तारी में राहत दी गई थी, लेकिन पुलिस ने उनके दो पार्षदों को वोट डालने से पहले बिल्डिंग में घुसने से रोक दिया।

पुलिस का कहना है कि संबंधित पार्षद मंडल और कार्तिक मंडल ध्का दावा है कि उन्हें एक तृणमूल महिला पार्षद की ओर से कराई गई अपहरण की शिकायत में मामले अंतरिम जमानत मिली हुई है। पुलिस के मुताबिक, जब उन्होंने अंतरिम जमानत की कॉपी मांगी तो पार्षद कागजात नहीं दिखा पाए। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने कोर्ट के कथित आदेश की कॉपी फोन पर दिखाई इसलिए उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। बता दें कि इसके बाद ही हिंसा शुरू हो गई।

उधर जब तृणमूल के पार्षद चले गए तो 11 बीजेपी पार्षदों ने दावा किया कि उन्होंने तृणमूल चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया और वे जीत गए। इस आधार पर उन्होंने म्युनिसिपैलिटी पर अपना नियंत्रण होने का दावा किया। हालांकि, बोर्ड चेयरमैन तृणमूल नेता ने कहा कि बीजेपी के पार्षद विश्वास मत में शामिल नहीं हुए।

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