RPF recovers 1500 tortoises in 35 bags from a train at Malda Town rly station - Jansatta
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ट्रेन के कोच में पकड़े गए 35 बैगों में छिपाकर रखे गए 1500 कछुए, आरपीएफ ने 3 लोगों को किया अरेस्ट

पिछले महीने में यूपी के अमेठी से 6 हजार से ज्यादा कछुओं को बरामद किया गया था। इन सभी को तस्करी के लिए थाईलैंड समेत कई देशों में भेजा जाना था।

तस्करी के लिए लाए गए 1500 कछुए बरामद। (ANI Photo)

कोलकाता पश्चिम बंगाल के मालदा रेलवे स्टेशन पर तस्करी के लिए ले जाए जा रहे 1500 कछुओं को बरामद किया गया है। शनिवार को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने कछुओं के साथ तीन लोगों के गिरफ्तार किया। रेलवे पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक मालदा रेलवे स्टेशन में एक ट्रेन के कोच में 35 बैगों में कछुओं को पैक करके ले जाया जा रहा था। पुलिस ने तस्करी करने वालों को पकड़ने के बाद कछुओं को वन विभाग के हवाले कर दिया था। हालांकि अभी तक यह नहीं पता चल सका है कि कछुओं को तस्करी के लिए कहा ले जाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कछुओं को प्रतापगढ़ से आनंदगढ़ एक्सप्रेस से मालदा लाया गया था। पुलिस को जब शक हुआ तो उन्होंने बैगों की तालाशी ली। जिसमें से भारी मात्रा में कछुए बरामद हुए। बैग में मिले सारे कछुओं का रंग ब्लैक है और उनका वजन 200 ग्राम से 1 किलो ग्राम के बीच बताया जा रहा है।

पिछले महीने देश के सबसे बड़े कछुआ तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ था
पिछले महीने में यूपी के अमेठी से 6 हजार से ज्यादा कछुओं को बरामद किया गया था। इन सभी को तस्करी के लिए थाईलैंड समेत कई देशों में भेजा जाना था। एसटीएफ और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में अमेठी में प्रदेश में कछुओं की तस्करी करने वाले बड़े गिरोह को पकड़ा गया और तस्करों के पास से 6334 कछुए बरामद किए गए हैं। तस्करी में गिरफ्तार सरगना राज बहादुर ने पुलिस की पूछताछ में बताया, “उसका गिरोह अमेठी के गौरीगंज, जगदीशपुर और सलवन क्षेत्र में बड़ी संख्या में छोटे-छोटे पोचर कछुओं का शिकार करता है, जब बड़ी मात्रा में कछुआ इकट्ठा हो जाता है तो उसके ट्रक और छोटी गाड़ियों के जरिए कोलकाता ले जाकर वहां के बड़े तस्करों को बेचता था।

क्यों होती है कछुओं की तस्करी
राजबहादुर के मुताबिक ये कछुए कोलकाता से चीन, थाइलैंड, सिंगापुर और बर्मा भेजे जाते थे। जहां यौन शक्ति वर्धक दवाएं और फेंगशुई के लिए इनका इस्तेमाल होता है। इसके बदले लाखों रुपये मिलते हैं। देश में कछुओं की विविधता की दृष्टि से असम के बाद उत्तर पद्रेश का दूसरा स्थान है। देश में कछुओं की पाई जाने वाली 28 प्रजातियों में से 15 प्रजातियों प्रदेश में और 13 प्रजातियां कुकरैल कछुआ पुनर्वास केन्द्र में पाई जाती हैं।

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