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ममता से मिले रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल, मुख्यमंत्री ने नोटबंदी पर चिंताओं से कराया अवगत

इस दौरान ममता की पार्टी टीएमसी के और विपक्षी मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ताओं ने वहां आरबीआई के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

Author कोलकाता | December 15, 2016 9:16 PM
रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल। (Photo Source: PTI/File)

बड़े मूल्य के नोटों का चलन बंद करने के निर्णय के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) की ओर से विरोध के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल ने गुरुवार (15 दिसंबर) को यहां राज्य सरकार के सचिवालय भवन में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस मुलाकात में ममता ने पटेल को नोटबंदी से आम लोगों की परेशानी तथा इसके प्रबंध में ‘राज्यों के बीच राजनीतिक भेदभाव’ को लेकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया। बैठक के बाद पटेल ने संवाददाताओं से कहा, ‘मुलाकात अच्छी रही।’ इससे पहले पटेल ने गुरुवार को यहां केंद्रीय बैंक के कार्यालय पर आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की बैठक में भाग लिया। इस दौरान ममता की पार्टी टीएमसी के और विपक्षी मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ताओं ने वहां आरबीआई के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

ममता से जब इस मुलाकात के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मैं (पटेल के साथ) मुलाकात से संतुष्ट हूं।… मैंने इसमें देश के आम लोगों को हो रही भारी असुविधा का मामला उठाया…प्रधानमंत्री, संसद कोई उपलब्ध नहीं है। कोई जवाब नहीं दे रहा है। वह (पटेल) सीधी बात करने वाले व्यक्ति हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आरबीआई एक बड़ी संस्था है। हम उसका सम्मान करते हैं। इसका राजनीतिक दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। ममता ने आरबीआई गवर्नर पटेल को संबोधित एक पत्र भी दिया जिसमें कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक एक स्वायत्त निकाय है। इसका एक महान इतिहास है। यह देश में बैंक नोट जारी करता है। इसके गवर्नर के रूप में हम आपस उम्मी करते हैं कि आप संकट की इस घड़ी में चुप हो जाने और अस्पष्ट होने की बजाए देश की जनता पर नोटबंदी के इस हमले के खिलाफ खड़े होगें।’ ममता ने पटेल से राज्यों को नए नोट आवंटित करने के स्वरूप की पारदर्शिता की भावना के साथ जानकारी देने को भी कहा है। उन्होंने कहा है कि इस मामलें में राज्यों के बीच राजनीतिक भेदभाव किए जाने की गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है। उन्होंने लिखा है कि नोटबंदी के क्रूर निर्णय से पूरे देश में अभूतपूर्व संकट पैदा हुआ है और दो तिहाई रोजगार देने वाला असंगठित क्षेत्र तबाह हो गया है।

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