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पश्चिम बंगाल: साइबर अपराध का जाल और फैला

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ सालों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ा है। सूबे में वर्ष 2013 में राज्य में साइबर अपराध के कुल 342 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2016 में यह संख्या 478 पर पहुंच गई।

Author कोलकाता। | August 22, 2018 6:24 AM
पश्चिम बंगाल में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए तमाम जिलों में बनाए जाने वाले साइबर थाने अत्याधुनिक कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर समेत सभी सुविधाओं से लैस होंगे।

शंकर जालान

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ सालों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ा है। सूबे में वर्ष 2013 में राज्य में साइबर अपराध के कुल 342 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2016 में यह संख्या 478 पर पहुंच गई। बढ़ते साइबर अपराध संख्या पर पुलिस यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लेती है कि अगर मामलों की संख्या बढ़ी है तो गिरफ्तारियां भी अधिक हुई हैं। हालांकि अपने स्तर पर राज्य सरकार साइबर अपराध पर अंकुश लगाने को तत्पर दिख रही है और कई तरह के कानून बनाकर उसे लागू कराने को सचेष्ट है, लेकिन देखना यह है कि सरकार और पुलिस की यह पहल कब तक रंग ला पाती है।

राज्य सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक सूबे समेत देश के कई हिस्सों में भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्टों से हो रही परेशानियों और अशांति की पृष्ठभूमि के मद्दे्नदर राज्य सरकार सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों और छेड़छाड़ की गई फोटो की समस्या से निपटने के लिए एक नए कानून पर काम कर रही है। राज्य के गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार की मंशा है कि समाज में शांति व सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या घृणा पैदा करने के मकसद से फर्जी खबरें फैलाने वालों और फोटो को छेड़छाड़ कर उन्हें पोस्ट करने के जिम्मेदार लोगों के अपराध और सजा की प्रकृति पर अधिक स्पष्टता लाई जाए।

वहीं, कोलकाता के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) प्रवीण त्रिपाठी ने जनसत्ता को बताया कि बीते दिनों ईद की छुट्टी को लेकर सोशल मीडिया में फर्जी सरकारी अधिसूचना वायरल होने के बाद से कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार का साइबर विभाग सक्रिय है। इस बाबत राजस्थान के एक आइएएस अधिकारी के अलावा महानगर के कई लोगों को नोटिस भेजा गया था। उन्होंने बताया कि मौजूदा कानून के मुताबिक राज्य में जनता के बीच डर या चिंता पैदा करने या अपराध करने की मंशा से ऐसे पोस्ट डालने वाले लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया जाता है, लेकिन नया कानून काफी सख्त होगा और इसके लागू होने के बाद आरोपियों के बच निकलने की संभावना कम रहेगी। नया कानून बनाने की प्रक्रिया में सरकार पुलिस की भी सहायता ले रही है। त्रिपाठी के मुताबिक पुलिस ने कई पेड ट्विटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट की पहचान की है, जिनका ऐसे पोस्टों के लिए अलग-अलग तरीके से लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है।

दूसरी ओर, नेशल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर दस मिनट में एक साइबर अपराध होता है। एनसीआरबी के रिकार्ड के मुताबिक सर्वाधिक साइबर अपराध वाले राज्यों की सूची में पश्चिम बंगाल का भी नाम शामिल है।
साइबर अपराध के मामलों के जानकारों का कहना है कि साइबर की दुनिया में तेजी बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर राज्य सरकार बेहद चिंतित है। साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर सरकार ने प्रत्येक जिले में एक साइबर थाना खोलने का निर्णय लिया है। राज्य सचिवालय के अधिकारियों के मुताबिक सब कुछ ठीकठाक रहा तो बहुत जल्द इस योजना पर अमल शुरू हो जाएगा। गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि फिलवक्त कोलकाता व राज्य में कुछ जगह अलग से साइबर थाना बनाया गया है, लेकिन जिस तेजी के साथ साइबर अपराध में वृद्धि हो रही है, उसकी तुलना में ये काफी कम है। इसलिए सरकार चाहती है कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक साइबर थाना हो।

कोलकाता के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) प्रवीण त्रिपाठी ने बताया कि राज्य सरकार नया कानून बनाते हुए अपराधियों के रिकॉर्ड रखने के अलावा पिछले कुछ वर्षों में बंगाल व देश के अन्य हिस्सों में सोशल मीडिया पर फैली फर्जी खबरों पर एक डाटा बैंक तैयार कर रही है।

पश्चिम बंगाल में साइबर अपराध पर लगाम की तैयारी

पश्चिम बंगाल में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए तमाम जिलों में बनाए जाने वाले साइबर थाने अत्याधुनिक कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर समेत सभी सुविधाओं से लैस होंगे। इन थानों में साइबर अपराध की गुत्थी सुलझाने से संबंधित सभी उपकरण उपलब्ध रहेंगे। सूचना-प्रौद्योगिकी के जानकार पुलिसवालों को विशेष प्रशिक्षण देकर इन थानों में तैनात किया जाएगा। उन्हें बैंक जालसाजी, एटीएम जालसाजी व सोशल नेटवर्किंग साइट से संबंधित अपराधों की गुत्थी सुलझाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इतना ही नहीं, साइबर अपराध के प्रति युवाओं को सचेत करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में स्नातक के पाठ्यक्रम में साइबर अपराध से जुड़े तथ्यों को शामिल किया है।

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