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दो अंतरराष्ट्रीय संधियों पर ममता बनर्जी का अड़ंगा, तीस्ता नदी जल बंटवारा और पद्मा नदी बांध परियोजना अटकी

चीन द्वारा हाल के दिनों में बांग्लादेश में पूंजी निवेश और रक्षा सहयोग बढ़ा है और उसके बाद शेख हसीना का भारत दौरान एक साल के भीतर तीन बार टला है।

Author जनसत्ता | February 23, 2017 2:45 AM
mamata banerjee, manohar parrikar, army row, west bengal CM, parrikar letter to mamata banerjee, parrikar mamata banerjeeपश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी

दीपक रस्तोगी

भारत और बांग्लादेश के बीच दो महत्वपूर्ण संधियों को लेकर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फच्चर फंसा दिया है। असम सरकार ने भी भारतीय विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को अपनी बाध्यताएं गिना दी हैं। दोनों राज्यों के रुख से अब यह साफ हो गया है कि बहुप्रतीक्षित दो अंतरराष्ट्रीय संधियों- तीस्ता नदी जल बंटवारा और पद्मा नदी बांध परियोजना पर बातचीत अटक गई है। ये परियोजनाएं बांग्लादेश में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई हैं और वहां की शेख हसीना सरकार ने भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत में इन संधि प्रस्तावों के लिए जोर देना शुरू किया है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेशी की बप्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच शिखर वार्ता का एजंडा तय करने ढाका गए विदेश सचिव एस. जयशंकर की चुनौतियां बढ़ गई हैं। 23 और 24 फरवरी को वहां विदेश सचिव शाहीदुल हक और प्रधानमंत्री शेख हसीना से उनकी वार्ता होगी। इसमें अप्रैल में हसीना के प्रस्तावित भारत दौरे में शिखर वार्ता के एजंडे को अंतिम रूप दिया जाएगा। चीन द्वारा हाल के दिनों में बांग्लादेश में पूंजी निवेश और रक्षा सहयोग बढ़ा है और उसके बाद शेख हसीना का भारत दौरान एक साल के भीतर तीन बार टला है। पड़ोसी मित्र-देश के रवैए में बदलाव के मद्देनजर भारत के राजनयिक गलियारों में हलचल है।

दोनों संधियों की रूपरेखा के अनुसार पश्चिम बंगाल और असम को भी द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय करार में भागीदार बनना होगा। ममता बनर्जी ने तीस्ता नदी जल बंटवारा संधि को लेकर पहले ही मना कर दिया है। ताजा मनाही उन्होंने बांग्लादेश के महत्वाकांक्षी पद्मा नदी बांध परियोजना के लिए की है। गंगा नदी की एक धारा अलग होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जिसे पद्मा नाम दिया गया है। भारत में फरक्का पर बनाए गए बांध से दो सौ किलोमीटर दूर बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले के पांग्शा में गंगा (पद्मा) पर बांध बनाया जाएगा। इससे दोनों देशों के 165 किलोमीटर के किनारे वाले क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की योजनाएं लागू करने की योजना है। तीस्ता और पद्मा- दोनों संधियों को रूपायित करने के लिए विश्व बैंक धन खर्च करेगा। ममता बनर्जी ने बंगाल के कई नदी विशेषज्ञों की राय का हवाला देते हुए इन संधियों के लिए न कहा है। बंगाल की मुख्यमंत्री के निर्देश पर वहां के मुख्य सचिव वासुदेव बनर्जी ने केंद्रीय जल संसाधन सचिव अमरजीत सिंह और विदेश सचिव एस. जयशंकर को पत्र लिख कर कहा है कि ‘दोनों संधि प्रस्तावों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को अंधेरे में रखा गया। फरक्का जल बंटवारे के लिए आंशिक संधि के चलते बंगाल को सालाना सात सौ करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। राज्य सरकार अनुमोदन नहीं कर सकती।’ ममता बनर्जी का तर्क है कि संधियों के जरिए तीस्ता और गंगा- दोनों नदियों के जल स्रोत के लिए फ्लड गेट्स का नियंत्रण बांग्लादेश के पास चला जाएगा।

बंगाल के मालदा, जलपाईगुड़ी, मुर्शिदाबाद और नदिया जिलों में कभी सूखे और कभी बाढ़ के हालात बनेंगे। दोनों देशों के लिए बनाई गई संयुक्त टीम में सलाहकार और बंगाल सरकार के प्रतिनिधि काजल माइति और विनय दास के अनुसार बंगाल की एक करोड़ से ज्यादा की आबादी प्रभावित हो जाएगी। भारत और बांग्लादेश की सरकारों ने संयुक्त टीम का गठन किया था। हाल में भारतीय जल संसाधन मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग की टीम को बांग्लादेश भेजा गया था। जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव नवीन प्रकाश की अगुआई में टीम ने अपनी तकनीकी रिपोर्ट भारत सरकार को दी, जिसकी प्रति बंगाल सरकार को दी गई। इसके जवाब में ही वहां के मुख्य सचिव ने केंद्र को पत्र लिखा। इसके बाद जल संसाधन सचिव फरवरी के पहले हफ्ते में कोलकाता भेजे गए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री और वहां के विशेषज्ञों के संधि के बारे में बताया, लेकिन नतीजा नहीं निकला। असम सरकार की भूमिका तीस्ता और पद्मा परियोजना को लेकर थोड़ी है। वहां की सरकार का रवैया बंगाल सरकार पर निर्भर करता है।

 

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