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कन्हैया पर BJP कार्यकर्ताओं ने फेंके सड़े अंडे, JNUSU अध्यक्ष ने केंद्र पर मढ़ा ‘असहिष्णुता’ का आरोप

सिंगूर में भूमि अधिग्रहण पर उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले पर संवाददाताओं से बातचीत में कन्हैया कुमार ने कहा कि किसानों की सहमति के बिना उनसे जमीन लेना गलत है।

Author कोलकाता | September 8, 2016 7:36 PM
गुरुवार (8 सितंबर) को कोलकाता में एआईएसएफ और एआईवाईएफ के संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करते जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैैया कुमार। (PTI Photo by Swapan Mahapatra)

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के नेता कन्हैया कुमार को गुरुवार (8 सितंबर) को यहां भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा जब वह एक सम्मेलन में वक्ता के रूप में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने कहा कि जैसे ही कुमार की कार महाजति सदन पहुंची, जहां एआईएसएफ और एआईवाईएफ ने संयुक्त रूप से सम्मेलन आयोजित किया था, भाजपा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कन्हैया पर सड़े अंडे फेंकने शुरू कर दिए। उन्होंने कुमार पर राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया और उनकी निंदा की।

जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया को कड़ी सुरक्षा के बीच किसी तरह उत्तरी कोलकाता के महाजति सदन ऑडिटोरियम में अंदर ले जाया गया। इस घटनाक्रम से व्यस्त सेंट्रल एवेन्यू पर यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने कहा कि तीन महिलाओं समेत दस प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए कन्हैया ने केंद्र पर असहिष्णुता का आरोप लगाया और हैदराबाद में दलित शोधछात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी का जिक्र किया।

बाद में कन्हैया ने पश्चिम बंगाल में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार द्वारा सिंगूर में भूमि अधिग्रहण पर उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि किसानों की सहमति के बिना उनसे जमीन लेना गलत है। उन्होंने कहा, ‘मैं भूमि अधिग्रहण के पूरी तरह खिलाफ नहीं हूं, अन्यथा उद्योग नहीं लगेंगे। लेकिन किसानों की सहमति के बिना उनकी जमीन नहीं ली जानी चाहिए।’ जब कन्हैया से पूछा गया कि क्या वह सिंगूर में तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के चलाए आंदोलन का समर्थन करते हैं तो उन्होंने कहा, ‘मैं किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन नहीं करता।’

उन्होंने कहा, ‘कोई एक व्यक्ति आंदोलन या क्रांति नहीं कर सकता। जनता करती है, ना कि नेता या कोई एक व्यक्ति। समाज में सामूहिक प्रयासों से बदलाव लाए जाते हैं और इसलिए मैं किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन नहीं करता।’ तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार द्वारा सिंगूर में जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के आंदोलन के चलते टाटा समूह को अपनी नैनो कार परियोजना को गुजरात के साणंद ले जाना पड़ा था। देश में वामपंथी आंदोलन का समर्थन आधार कम होने के बारे में कन्हैया ने कहा कि वामपंथी पार्टियों को आंदोलनों के बीच रहना होगा और जनता की साझेदारी बढ़ानी होगी।

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