X

पश्चिम बंगाल: सुरक्षा गार्ड की कल्पना उद्यान पुस्तकालय है लोकप्रिय

सामान्य पढ़ाई करने वाला एक सुरक्षाकर्मी भी यह भलीभांति जानता है कि मनुष्य को ज्ञानवान बनाने में पुस्तक और पुस्तकालय का कितना योगदान होता है।

सामान्य पढ़ाई करने वाला एक सुरक्षाकर्मी भी यह भलीभांति जानता है कि मनुष्य को ज्ञानवान बनाने में पुस्तक और पुस्तकालय का कितना योगदान होता है। इस सुरक्षाकर्मी का नाम है-सत्यरंजन दोलोई। उत्तर कोलकाता के राजबल्लभपाड़ा स्थित जगत मुखर्जी पार्क में सुरक्षाकर्मी की नौकरी करते-करते दोलोई के मन में ख्याल आया कि क्यों न पार्क में एक पुस्तकालय बनाया जाए और उसका ख्याल वर्ष 2011 में उस वक्त साकार हुआ, जब स्थानीय लोगों की मदद से 50 पुस्तकें जुटाकर दोलोई ने ‘उद्यान पुस्तकालय’ खोला।

आज पार्क में चल रहे इस पुस्तकालय में साहित्य व धर्म की तकरीबन साढ़े पांच सौ पुस्तकें हैं, जिनमें रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिमचंद चट्टोपाध्याय, स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस के अलावा शरतचंद बोस समेत बांग्ला के कई जानेमाने साहित्यकारों व लेखकों की पुस्तकें शामिल हैं। इसके अलावा कई हिंदी और अंग्रेजी की कहानी व कविता की किताबें भी इस पुस्तकालय में पाठकों के लिए उपलब्ध हैं। इस पुस्तकालय से सक्रिय रूप से जुड़े और पुस्तकालय में रॉटरी सेंट्रल क्लब के सौजन्य से लोहे की रैक और पेयजल की व्यवस्था करवाने वाले बुद्धदेव बक्सी के मुताबिक फेसबुक, वाट्सऐप, ट्विटर, यू ट्यूब और ई-पेपर के जमाने में भी पुस्तक और पुस्तकालयों की अहमियत कभी कम नहीं होगी। इस बात की पुष्टि करता है यह उद्यान पुस्तकालय, जो पार्क यानी मैदान में चलता है।

पेशे से सुरक्षाकर्मी और दूसरे शब्दों में कहें तो उद्यान पुस्तकालय के संस्थापक सत्यरंजन दोलोई ने जनसत्ता को बताया कि शुरुआती दौर में इस पुस्तकालय में 12 से 15 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी, लेकिन आज एक वक्त में यहां 50 से ज्यादा लोग बैठकर किताबें पढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह पुस्तकालय सातों दिन सुबह पांच बजे से रात नौ बजे तक खुला रहता है। दोलोई ने बताया कि पुस्तकों के रखरखाव के लिए स्थानीय पार्षद पार्थ मित्र ने दो आलमारी देने का भरोसा दिया है। आलमारी आते ही पुस्तकों की संख्या में और इजाफा किया जाएगा।

कहना कतई गलत नहीं होगा कि राज्यभर में करीब ढाई हजार पुस्तकालय हंै, जिनमें से कोई 15 साल से चल रहा है तो कोई 20 साल से, लेकिन महज सात साल में जगत मुखर्जी पार्क में चलने वाले उद्यान पुस्तकालय ने जो प्रसिद्ध पाई है वह इन ढाई हजार पुस्तकालय से कहीं ज्यादा है। स्थानीय पार्षद पार्थ मित्र ने बताया कि उद्यान पुस्तकालय में औसतन रोजाना एक सौ लोग आकर पुस्तक पढ़ते हैं। पार्षद के मुताबिक फिलहाल उद्यान पुस्तकालय में बांग्ला के दो और हिंदी का एक समाचार-पत्र आता है। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी समाचार-पत्र की व्यवस्था भी की जाएगी।

एक ओर, जहां राज्य के लगभग सभी पुस्तकालय कर्मचारी और धन की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में यह पुस्तकालय दर्शाता है कि इच्छाशक्ति प्रबल हो तो सब कुछ संभव है। राज्य के पुस्तकालय मंत्री सिद्दिकुल्ला चौधरी कि मानें तो राज्य में कुल 2480 पुस्तकालयों में से नाना कारणों से तीन सौ बंद हो चुके हैं और जो चालू हैं उनमें भी 32 सौ पद लंबे समय से रिक्त हैं। उनका कहना है कि खाली पदों पर नियुक्ति के लिए सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वित्त मंत्री अमित मित्र व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के साथ कागजी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन यह प्रक्रिया कब पूरी होगी? इसका कोई सटीक जवाब पुस्तकालय मंत्री के पास नहीं है। राजबल्लभपाड़ा के आसपास के निवासियों का कहना है कि कम पढ़ा-लिखा होने के बावजूद पुस्तक के प्रति दोलोई का लगाव उनके बच्चों को पठन-पाठन के लिए प्रेरित करेगा।