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बच्‍चे के गले में अटका एक रुपए का सिक्‍का, 4 अस्‍पताल नहीं कर पाए इलाज

बच्चे के दादा दिनेश ने बताया कि अर्घ्य घर में अकेला खेल रहा था। इस दौरान उसे एक रुपए का सिक्का मिला, जिसे उसने निगल लिया।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में बीते शनिवार (11 अगस्त, 2018) को चार साल के अर्घ्य बिस्वास के गले सिस्का अटक गया तो परिजनों  को सिक्का निकलवाने के लिए चार हॉस्पिटलों में चक्कर काटे मगर डॉक्टर बच्चे के गले से सिक्का नहीं निकल पाए। आखिर में एसएसकेएम हॉस्पिटल में एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के जरिए गल्ले में अटके सिक्के को बाहर निकाला गया। गंगापुर निवासी बच्चे के दादा दिनेश ने बताया कि अर्घ्य घर में अकेला खेल रहा था। इस दौरान उसे एक रुपए का सिक्का मिला, जिसे उसने निगल लिया।

दिनेश के मुताबिक, ‘दिन में करीब दो बजे हम अर्घ्य को कल्याणी कॉलेज ऑफ मेडिसिन एंड जेएनएस हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। वहां शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने इंडोस्कोपिक के जरिए सिक्का निकालने के सलाह दी। मगर वो इस तकनीक के जरिए सिक्का निकालने में नाकाम रहे, क्योंकि हॉस्पिटल में उपकरण नहीं थे। बाद में डॉक्टरों ने एनआरएस हॉस्पिटल या मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल जाने की सलाह दी।’

दिनेश बताते हैं कि इसपर हम रात करीब दस बजे NRS हॉस्पिटल पहुंचे। वहां भी ऐसा ही हुआ। वहां के डॉक्टर्स भी हमारी मदद नहीं कर सके। वो सिर्फ एक्स-रे के जरिए इतना बता पाए कि अर्घ्य के गले में सिक्का अटका है। लेकिन गले से सिक्का निकालने का उनके पास कोई तरीका नहीं था। अर्घ्य की मां के निधन के बाद हमीं उसका ख्याल रखते है।

दिनेश कहते हैं, ‘हर जगह से निराश होने के बाद हम मेडिकल कॉलेज ऑफ हस्पिटल पहुंचे। वहां भी ऐसा हुआ। उस हॉस्पिटल के डॉक्टर भी हमारी मदद नहीं कर पाए। शरीर में अंदर की तरफ सिक्का जाने से अर्घ्य की हालात लगातार बिगड़ती जा रही थी। आधी रात को रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिस्थापन पहुंचे तो वहां भी निराशा ही हाथ लगी।’

बच्चे के दादा दिनेश के मुताबिक रात दो बजे एसएसकेएम हॉस्पिटल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के तहत सिक्का निकालने का निर्णय लिया। सिक्का गले से बाहर निकलने पर दिनेश हॉस्पिटल का धन्यवाद करते हुए कहते हैं कि ‘अर्घ्य अब ठीक है। वह आराम से बात कर पा रहा है।’

पेशे से राजमिस्त्री दिनेश कहते हैं कि वो हैरान हो गए जब बड़े हॉस्पिटलों के डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि बच्चे के गले से सिक्का निकालने वाले उपकरण उनके पास नहीं हैं।

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