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बंगाल: निवेशकों के सम्मेलन में नहीं जाएंगे वित्त मंत्री अरुण जेटली, केंद्र-राज्य के बीच कड़वाहट बढ़ने का अंदेशा

बीते सप्ताह जेटली ने सम्मेलन का न्योता कबूल कर लिया था। इससे राज्य सरकार के अलावा यहां भाजपा नेताओं-समर्थकों को भी हैरत हुई थी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली। (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार के बीच नोटबंदी के बाद बने छत्तीस के आंकड़े को ध्यान में रखते हुए यह कयास तो पहले से ही लगाए जा रहे थे, लेकिन अब इसकी पुष्टि भी हो गई है। 20 जनवरी से यहां होने वाले ‘बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट’ में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शिरकत करने से मना कर दिया है। हालांकि पहले उन्होंने इसमें आने का न्योता कबूल कर लिया था, पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की बीच बढ़ी कड़वाहट और खासकर चिटफंड घोटाले में तृणमूल के दो सांसदों की गिरफ्तारी के बाद उपजी परिस्थिति में जेटली ने इस सम्मेलन में नहीं आने का फैसला किया है। वैसे, वित्त मंत्री के तौर पर वे हर साल इसमें शिरकत करते रहे हैं।

यहां भाजपा सूत्रों ने बताया कि केंद्र-राज्य संबंधों को राजनीति से परे रखने की वकालत करने वाले जेटली भी लगातार बदलते राजनीतिक हालात को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले को बदलने पर मजबूर हो गए। यहां धोखाधड़ी के आरोप में भाजपा के एक उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजुमदार को बीते सप्ताह गिरफ्तार किया गया। उसके बाद पार्टी ने मजुमदार परलगे आरोपों को निराधार बताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बदले की राजनीति करने का जवाबी आरोप लगाया है। ममता पहले से ही केंद्र पर यही आरोप लगाती रही हैं। खासकर रोजवैली चिटफंड घोटाले में अपने दो सांसदों-तापस पाल और सुदीप बनर्जी की गिरफ्तारी के बाद तो दीदी के तेवर और उग्र हो गए हैं। इसके अलावा जीएसटी के मुद्दे पर भी केंद्र व बंगाल के बीच तनातनी कायम है।

वैसे, बीते सप्ताह जेटली ने सम्मेलन का न्योता कबूल कर लिया था। इससे राज्य सरकार के अलावा यहां भाजपा नेताओं-समर्थकों को भी हैरत हुई थी। ममता ने जेटली को इस सम्मेलन का न्योता नोटबंदी के एलान से दो हफ्ते पहले ही दिया था। उन्होंने बीते दिसंबर में अरुण जेटली के जन्मदिन पर उनको बधाई भी दी थी। उसके बाद ममता ने दावा किया था कि नोटबंदी के विरोध की वजह से जेटली के साथ उनके निजी संबंधों में कोई कड़वाहट नहीं आई है।प्रदेश भाजपा के एक नेता ने कहा कि मौजूदा हालात में जेटली के इस सम्मेलन में हिस्सा लेने का कोई मतलब नहीं था। उसका कहना था कि इस समय भाजपा व ममता बनर्जी के बीच जंग छिड़ी है और सरकार झूठे आरोपों में पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार कर रही है।

दूसरी ओर, तृणमूल के लोग भाजपाइयों पर हमले कर रहे हैं। उस नेता ने कहा, मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में पार्टी के एक वरिष्ठ केंद्रीय नेता के ममता के साथ मंच साझा करने से भाजपा और बंगाल के लोगों में एक गलत संदेश जाता। प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा कहते हैं कि मौजूदा हालातों में ऐसी किसी कवायद का कोई मतलब नहीं है। जेटली सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि हमने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बता दिया था कि जेटली के यहां आने से लोगों में गलत संदेश जाएगा।यहां राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि जेटली के इस इनकार से केंद्र और ममता बनर्जी के बीच की खाई और बढ़ेगी। इस सम्मेलन के दौरान और उसके बाद ममता केंद्र के खिलाफ बदले की राजनीति करने और केंद्र-राज्य संबंधों पर राजनीति को तरजीह देने जैसे आरोपों पर और मुखर हो सकती हैं।

 

 

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