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हड़ताल पर अड़े डॉक्टरों ने कहा माफी मांगें ममता, रखीं छह शर्तें

इस बीच, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के समर्थन में विभिन्न सरकारी अस्पतालों के 100 से ज्यादा वरिष्ठ चिकित्सकों ने सेवा से इस्तीफा दे दिया। अस्पतालों में तैनात जूनियर डॉक्टरों ने गुरुवार से इस्तीफे देने शुरू किए।

Author Updated: June 15, 2019 5:58 AM
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

पश्चिम बंगाल के हड़ताली जूनियर डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बिना शर्त माफी की मांग करते हुए काम पर लौटने के लिए छह शर्तें रखी हैं। इसमें ममता बनर्जी से बिना शर्त माफी की मांग भी शामिल है। जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल में बंगाल के विभिन्न सरकारी अस्पतालों के वरिष्ठ चिकित्सक भी शामिल होने लगे हैं और इस्तीफे देने लगे हैं। इस बीच कोलकाता के नीलरत्न सरकार मेडिकल अस्पताल के अधीक्षक ने इस्तीफा दे दिया। इस बीच देर रात मिली सूचना के मुताबिक ममता बनर्जी ने आंदोलनकारी चिकित्सकों को गतिरोध सुलझाने के लिए राज्य सचिवालय में बैठक के लिए बुलाया लेकिन चिकित्सकों ने निमंत्रण ठुकरा दिया।

इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने चिकित्सकों की हड़ताल पर राज्य सरकार को कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश टीबीएन राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष के खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह हड़ताल कर रहे चिकित्सकों को काम पर लौटने और मरीजों को सामान्य सेवाएं देने के लिए राजी करे। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि वह सोमवार रात को शहर के एक अस्पताल में कनिष्ठ चिकित्सकों पर हमले के बाद उठाए गए कदमों के बारे में उसे बताए।

हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि ममता बनर्जी को अपने रवैये के लिए माफी मांगनी चाहिए। जूनियर डॉक्टरों के फोरम के प्रवक्ता डॉक्टर अरिंदम दत्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिस अंदाज में डॉक्टरों को धमकी दी, वैसे बात नहीं करनी चाहिए थी। हम इस मामले की जांच की मांग कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने डॉक्टरों की हड़ताल को बाहरी लोगों की मदद का जिक्र कर भाजपा और माकपा पर उन्हें हवा देने का आरोप लगाया था। हड़ताली डॉक्टरों की मांग है कि मुख्यमंत्री को अस्पताल में जाकर डॉक्टरों से मिलना होगा और उनके दफ्तर को हमले की निंदा करनी होगी। डॉक्टरों ने हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा पूरे राज्य में जूनियर डॉक्टरों और चिकित्सा छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की भी शर्त रखी गई है।

इस बीच, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के समर्थन में विभिन्न सरकारी अस्पतालों के 100 से ज्यादा वरिष्ठ चिकित्सकों ने सेवा से इस्तीफा दे दिया। अस्पतालों में तैनात जूनियर डॉक्टरों ने गुरुवार से इस्तीफे देने शुरू किए। कोलकाता, दार्जीलिंग, बर्दवान और उत्तर 24 परगना के मेडिकल कॉलेजों में तैनात सैकड़ों जूनियर डॉक्टरों ने विरोध में इस्तीफा दे दिया है। कलकत्ता स्कूल आॅफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के निदेशक डॉ. पी कुंडू ने त्यागपत्र में लिखा, ‘ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर पर बर्बर हमले के खिलाफ प्रदर्शनरत एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा अन्य अस्पतालों के मौजूदा घटनाक्रम पर पूरी एकजुटता जताते हैं।’ नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के दवा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर (डॉ.) दीपांजन बंदोपाध्याय ने कहा, ‘सभी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षा की उनकी मांग का हम समर्थन करते हैं।’ वहां के 119 डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया है।

कोलकाता के बुद्धिजीवी भी डॉक्टरों की हड़ताल के समर्थन में आ गए हैं। अभिनेत्री एवं फिल्मकार अपर्णा सेन ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आंदोलनकारी चिकित्सकों से माफी मांगनी चाहिए और जूनियर डॉक्टरों के साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत करनी चाहिए। अपर्णा सेन के अलावा अभिनेता कौशिक सेन, संगीतकार देवज्योति मिश्रा समेत कई बुद्धिजीवियों ने हड़ताली डॉक्टरों से मुलाकात की।

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